पिता को बेटी के बालिग होने तक देना होगा 15 हजार रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता
नई दिल्ली
एक व्यक्ति की उस याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया है जिसमें उसने अपनी नाबालिग बेटी को 15 हजार रुपये गुजाराभत्ता देने में असमर्थता दिखाई थी। अदालत ने कहा कि एक पिता की जिम्मेदारी बनती है कि वह अपनी बेटी की उचित परवरिश के लिए कमाई के हिसाब से गुजाराभत्ता दे। लिहाजा अदालत आदेश देती है कि प्रत्येक महीने की दस तारीख तक बेटी को 15 हजार रुपये का भुगतान करे। कड़कड़डूमा स्थित प्रिंसीपल जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमेश कुमार की अदालत ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि निचली अदालत ने पिता की कमाई का सही आंकलन किया है। अदालत ने कहा कि एक पिता की जिम्मेदारी बनती है कि बच्चे के बालिग होने तक वह उसके मानसिक व शारीरिक विकास के लिए अपनी आर्थिक स्थिति के हिसाब से गुजाराभत्ता दे। वहीं, पिता का कहना था कि उसकी मासिक आय जितनी मानी गई है वह उतनी नहीं है।
इस पर सत्र अदालत ने कहा कि खुद वादी द्वारा पेश आयकर संबंधी दस्तावेज पेश किए गए हैं और उसके मुताबिक पिता की मासिक आय 45 हजार रुपये दर्शाई गई है। इसलिए अदालत पिता की कमाई के एक तिहाई हिस्से को बेटी की परवरिश लिए भुगतान करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। साथ ही अदालत ने कहा कि इस आदेश की अनदेखी ना की जाए। बच्ची को गुजाराभत्ते की बहुत जरुरत है। इसलिए उसे समय से गुजाराभत्ता दिया जाए, ताकि उसकी पढ़ाई अथवा कोई और खर्च प्रभावित ना हो।
