अंकित दास का ड्राइवर तीन दिन की पुलिस रिमांड में भेजा गया 

लखीमपुर खीरी
लखीमपुर कांड के आरोपी व्यापारी अंकित दास के ड्राइवर शेखर को अदालत ने तीन दिन की एसआईटी की रिमांड मंजूर कर ली है। बुधवार की सुबह पेशी के बाद सुनवाई शुरू हुई। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने अंकित दास के ड्राइवर शेखर को रिमांड पर देने का फैसला सुनाया। सोमवार को लखीमपुर हिंसा के मुख्य आरोपी गृह राज्यमंत्री के बेटे आशीष मिश्रा को भी अदालत ने तीन दिन की रिमांड पर भेजा है। एसआईटी ने आशीष की भी 14 दिन के लिए रिमांड मांगी थी, जिसे अदालत ने केवल तीन दिन की मंजूर की है। आशीष की रिमांड के दौरान कुछ शर्तें भी रखी गई थीं। आपको बता दें कि लखीमपुर खीरी हिंसा में आरोपी अंकित दास और उसके गनर को आज पुलिस ने उस वक्‍त हिरासत में ले लिया जब वह कोर्ट में सरेंडर करने की फिराक में था। इसके थोड़ी ही देर पहले अंकित के लखनऊ स्थित आवास पर एसआईटी की ओर से नोटिस चस्‍पा कर उसे बयान दर्ज कराने के लिए क्राइम ब्रांच के लखीमपुर खीरी स्थित दफ्तर बुलाया गया था। नोटिस में अंकित को बयान दर्ज कराने के लिए आज ही यानी 13 अक्‍टूबर की ही तारीख दी गई थी। इसके थोड़ी देर बाद लखीमपुर में अंकित के क्राइम ब्रांच के दफ्तर पहुंचने की सूचना आई। बताया जा रहा है कि उसके साथ कई वकील भी हैं। फिलहाल क्राइम ब्रांच के दफ्तर में अंकित से पूछताछ हो रही है। पुलिस ने उसके साथ ही उसके निजी गनर लतीफ को भी हिरासत में लिया है। दोनों को क्राइम ब्रांच के दफ्तर ले जाया गया है। अंकित पर तीन अक्‍टूबर को लखीमपुर में हुई हिंसा के दौरान घटनास्‍थल पर मौजूद रहने का आरोप है। वह इस मामले में गिरफ्तार मुख्‍य आरोपी और केंद्रीय गृह राज्‍यमंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा का करीबी बताया जाता है। लखीमपुर हिंसा के दौरान किसानों को कुचलने वाली थार जीप के पीछे-पीछे चल रही फार्रच्‍यूनर अंकित दास के नाम रजिस्‍टर्ड बताई जा रही है।

अंकित के ड्राइवर से हो चुकी थी पूछताछ
पुलिस अंकित के ड्राइवर से पहले ही पूछताछ कर चुकी है। बुधवार सुबह पुलिस ने अंकित के नाम जारी नोटिस को उनके आवास पर चस्‍पा किया। उधर, लखीमपुर हिंसा मामले में मुख्‍य आरोपी और केंद्रीय गृहराज्‍य मंत्री आशीष मिश्रा की पुलिस रिमांड का आज दूसरा दिन है। पुलिस आशीष से लखीमपुर हिंसा के राज उगलवाने के लिए पूछताछ कर रही है। तीन अक्‍टूबर को लखीमपुर में हुई हिंसक झड़प में चार किसान, भाजपा कार्यकर्ता और पत्रकार सहित कुल आठ लोगों की मौत हो गई थी।
 

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