स्कॉलरशिप से अध्यापक ने घर में बनाया डिजिटल स्कूल सेट-अप

रायपुर
बालोद जिले के चित्तूद गांव के सरकारी स्कूल में पिछले 13 साल से कक्षा पहली से पांचवी के बच्चों को गणित की शिक्षा दे रहे ईश्वरी कुमार सिन्हा एक असिस्टेन्ट अध्यापक हैं। कोविड – 19 के दौरान जब स्कूल बंद हो गए तब उनके पास बच्चों को पढ़ाने के लिए कोई डिजिटल प्लेटफार्म नहीं था इसलिए उन्होंने घर पर ही स्कूल जैसा सेट-अप बनाया। महामारी के शुरूआती आठ महीनों में सिन्हा ने अपने घर में ही 300 छात्रों को हिंदी और अंग्रेजी की टाइपिंग सिखाई।

कोविड-19 के दौरान जब स्कूल बंद हो गए तब 45 वर्षीय सिन्हा को अपने छात्रोंं को पढ़ाने के लिए कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उनके लिए एक ही विकल्प था कि गली में बैठकर बच्चों को पढ़ाएं क्योंकि उनके पास डिजिटल रिसोर्सेज नहीं थे। सिन्हा ने हार नहीं मानी और बच्चों की पढ़ाई जारी रखने का फैसला लिया। इसके लिए उन्हें अपने पढ़ाने के तरीकों को अपग्रेड करना था। स्कूल जल्दी खुलने की कोई संभावना नहीं थी, इसलिए सिन्हा ने घर पर ही स्कूल जैसा सेट-अप बनाया। महामारी के शुरूआती आठ महीनों में सिन्हा ने अपने घर में ही 300 छात्रों को हिंदी और अंग्रेजी की टाइपिंग सिखाई।  हालांकि सिन्हा हमेशा से अपने छात्रों के लिए लर्निंग को बेहतर बनाना चाहते थे। वे अपने घर में डिजिटल सेट-अप बनाना चाहते थे और छात्रों के लिए ई-लर्निंग को आसान बनाना चाहते थे। तभी उन्हें गुरूशाला से वी स्कॉलरशिप के बारे में पता चला। सिन्हा के अच्छे रिकॉर्ड को देखते हुए उन्हें एक लाख रुपये की छात्रवृत्ति दे दी गई।

इस राशि का उपयोग कर उन्होंने एक आधुनिक कम्प्युटर सिस्टम खरीदा और इंटरनेट लगवाया। उन्होंने अपने घर की लाइब्रेरी के लिए किताबें खरीदकर इसे अपग्रेड किया, खासतौर पर उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें खरीदीं। इस नई डिजिटल सेटिंग के साथ सिन्हा को पढ़ाने में बहुत मदद मिली। मई से जून 2021 के बीच वे रोजाना 40 से अधिक छात्रों को कोडिंग तथा हिंदी और अंग्रेजी की टाइपिंग सिखाते। अन्य गांवों से भी कुछ छात्र उनसे पढ़ते थे। अब वे छात्रों को यूपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करा रहे हैं।

वी स्कॉलरशिप से मिली राशि ने उनके इस सपने को भी साकार कर दिया, उन्होंने उस स्कूल के छात्रों के लिए कम्प्यूटर दान में दिए जहां से वे खुद पढ़े थे। स्कॉलरशिप की राशि में 25000 रुपये का उपयोग कर उन्होंने अपने छात्र सैम्युल साहु के लिए सैकण्ड हैण्ड टच-स्क्रीन लैपटॉप खरीदा और उन्हें अडवान्स्ड कोडिंग क्लास के लिए रजिस्टर किया।  एक अध्यापक के रूप में सिन्हा की सपने और महत्वाकांक्षाएं असीमित हैं। वे अपने स्कूल में डिजिटल बदलाव लाना चाहते हैं और अपने छात्रों को कोडिंग, सॉफ्टवेयर डिजाइन आदि में प्रशिक्षण देना चाहते हैं। उनकी महत्वाकांक्षाएं सिर्फ उनके स्कूल तक ही सीमित नहीं हैं, वे आने वाले समय में पूरे चित्तूद गांव में डिजिटलीकरण लाना चाहते हैं।

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