‘कश्मीर हमारा है’ का दावा, एक हफ्ते में अलकायदा ने दूसरी बार जारी किया वीडियो, बाबरी मस्जिद का जिक्र

नई दिल्ली
विश्व के सबसे खतरनाक आतंकवादी संगठनों में से एक अलकायदा ने एक हफ्ते में दूसरी बार कश्मीर को लेकर वीडियो जारी किया है। अफगानिस्तान में तालिबान राज स्थापित होने के बाद कश्मीर में आतंकी गतिविधियों के फिर से तेजी के साथ शुरू होने की आशंका जताई जा रही थी और अब अलकायदा जैसे आतंकी संगठनों ने कश्मीर को लेकर वीडियो जारी करना और प्रोपेगेंडा फैलाने का खेल शुरू कर दिया है।

भारतीय उपमहाद्वीप में स्थित आतंकवादी संगठन अलकायदा के आतंकवादियों ने 'कश्मीर हमारा है' नाम के साथ एक वीडियो जारी किया है। 18 मिनट के इस वीडियो में बाबरी मस्जिद विध्वंस, बच्चों और महिलाओं पर अत्याचार के बारे में बात की गई है। इसमें "भारतीय सेना द्वारा की गई यातना" का भी उल्लेख है। अल-कायदा ने अपने वीडियो में कहा है कि उन्होंने 'ऊपर बताए गए कारणों' से बंदूकें उठाई हैं। आपको बता दें कि, पिछले हफ्ते वीडियो में असम में बदला लेने की बात कही गई थी। शीर्ष खुफिया सूत्रों ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया कि अल-कायदा, टीआरएफ और दूसरे आतंकवादी संगठन पाकिस्तान द्वारा बनाए गए हैं और इस वीडियो की स्क्रिप्ट पाकिस्तान में लिखी गई है। (फाइल तस्वीर अलजाहिरी)

भारत के शीर्ष खुफिया सूत्रों ने कहा कि, "एफएटीएफ और बाकी अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में ग्रे-लिस्ट में डाले जाने के बाद अब पाकिस्तान ने ऐसे ही फर्जी संगठनों का इस्तेमाल प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए करना शुरू कर दिया है''। पिछले महीने पाकिस्तानी मीडिया की एक रिपोर्ट में तालिबान के हवाले से कहा गया था कि, उसे कश्मीर सहित कहीं भी मुसलमानों के पक्ष में बोलने का अधिकार है। हालांकि, जब न्यूज-8 ने तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन से संपर्क किया, तो उन्होंने कहा कि उनके शब्दों को "तोड़-मरोड़" कर पेश किया गया है और कश्मीर मुद्दे पर तालिबान की वही सोच है, जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर है। तालिबान ने कहा था कि, कश्मीर का मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच का है और भारत और पाकिस्तान को ही इस समस्या को सुलझाना है, तालिबान का इससे कोई लेना-देना नहीं है।

तालिबान के प्रवक्ता सुलैह शाहीन ने न्यूज18 से कहा कि, "जिस तरह भारत, अफगान हिंदुओं और सिखों के बारे में चिंतित है, यह सोचकर कि कोई समस्या है, मुस्लिम दुनिया भी उसी संदर्भ में कश्मीर के बारे में चिंतित है," उन्होंने दोहराया कि, अफगानिस्तान कश्मीर में हस्तक्षेप नहीं करेगा। प्रवक्ता ने कहा कि तालिबान की नीति किसी भी देश के खिलाफ "सशस्त्र अभियान" चलाने की नहीं है और ना ही तालिबान इसके लिए अपनी जमीन का इस्तेमाल होने देगा। वहीं, दोहा में अपने राजनीतिक कार्यालय से तालिबान के प्रवक्ता शाहीन ने गुरुवार को वीडियो लिंक के माध्यम से बीबीसी को एक इंटरव्यू दिया है, जिसमें तालिबान के प्रवक्ता ने कहा है कि, ''हम अपनी आवाज उठाएंगे और कहेंगे कि आपके कानून के तहत मुसलमान आपके अपने लोग हैं, आपके अपने नागरिक हैं और वे समान अधिकारों के हकदार हैं।" 

दोहा से बोलते हुए तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने कहा कि, "मुसलमानों के रूप में कश्मीर और किसी अन्य देश में रहने वाले मुसलमानों के लिए बोलने का समूह का अधिकार था, क्योंकि अफगानिस्तान एक इस्लामिक अमीरात देश है''। हालांकि, जब एक बार सुहैल शाहीन से चीन में शिनजियांग में उइगर मुस्लिमों पर होने वाले अत्याचार को लेकर पूछा था, तो उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था। विशेषज्ञों का कहना है कि, तालिबान चीन से आर्थिक मदद चाहता है, लिहाजा वो उइगर मुस्लिमों को लेकर कोई आवाज नहीं उठाएगा।

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