नवीन निर्माण कार्यो के लिए मांगे थे 412 करोड़, केंद्र ने दिया सिर्फ 11 करोड़
भोपाल
केन्द्र सरकार ने इस बार मध्यप्रदेश को करारा झटका दिया है। राज्य सरकार ने वर्ष 21-22 के लिए स्कूलों से जुड़े नवीन निर्माण कार्यो के लिए 412 करोड़ 19 लाख रुपए मांगे थे लेकिन केन्द्र सरकार ने राज्य को केवल 11 करोड़ 93 लाख रुपए का बजट मंजूर किया है। अब सभी इंजीनियरों को चेतावनी दी गई है कि अगले चार माह में स्वीकृत स्पिल ओवर बजट का शत प्रतिशत उपयोग करे वर्ना नये सिरे से मूल्यांकन कर खर्च के लिए संबंधित इंजीनियरों से वसूली की जाएगी।
प्रदेश मे स्कूलों की अधोसंरचना निर्माण और नवीन निर्माण कार्यों के लिए बजट की कमी के कारण दिक्कत बढ़ गई है। इंजीनियरों द्वारा सजगता से काम नहीं करने और बजट का उपयोग समय पर नहीं करने से हालात बिगड़े है। स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी कलेक्टरों को पत्र लिखकर कहा है कि समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत अनुमोदित बजट का दो प्रतिशत ही प्रशासनिक व्यय मानदेय और अन्य परिलब्धियों में खर्च किया जा सकता है। इसी क्रम में अप्रैल 21 से अगस्त 21 तक निर्माण कार्य हेतु स्वीकृत स्पिलओवर बजट के विरुद्ध जिला स्तर से व्यय की राशि के अनुसार तकनीकी अमले द्वारा प्राप्त वित्तीय प्रगति के अनुपात में उनको देय परिलब्धियों की गणना की गई है।
वर्तमान आंकड़ों के अनुसार सभी जिलों में अत्यधिक कम वित्तीय प्रगति के कारण सहायक यंत्री और उपयंत्रियों से वसूली की स्थिति निर्मित हो रही है। जिले के तकनीकी अमले से यह अपेक्षा की गई है कि अक्टूबर से जनवरी तक चार महीनों के लिए स्वीकृत स्पिलओवर बजट का शत प्रतिशत व्यय कर सभी अपूर्ण निर्माण कार्य 31 जनवरी 22 तक पूरे कराए जाए।
ऐसा नहीं किया जाता है तो जनवरी 22 में वित्तीय प्रगति के आधार पर नये सिरे से मूल्यांकन कराया जाएगा और वसूली हेतु राशि की गणना की जाएगी और फरवरी और आगे के महीनों में होंने वाले कामों के लिए राशि संबंधित इंजीनियरों से वसूली जाएगी।
सभी कलेक्टरों को कहा गया है कि टीलए बैठक में समीक्षा इंजीनियरवार करें और जनवरी 22 तक अपूर्ण कार्यों को पूरा कराएं। अपूर्ण कार्यों को पूर्ण कराने हेतु कार्ययोजना बनाकर काम कराए। काम में लापरवाही या देरी करने वाले अफसरों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए।
