प्रदेश में नवरात्रि पहले दिन हुई 3 हजार 7 सौ 71 रजिस्ट्री

भोपाल

फेस्टिवल सीजन की शुरुआत होते ही मध्यप्रदेश में श्राद्ध पक्ष की वजह से रुके प्रापर्टी के सौदे होने लगे हैं। नवरात्र के पहले ही दिन मध्यप्रदेश में 3 हजार 7सौ 71 रजिस्ट्री हुईं। यानी लोगों ने इतनी जमीन, मकान और फ्लैट‌्स खरीदे। सबसे ज्यादा इंदौर में 605 रजिस्ट्री हुई, जबकि भोपाल में आंकड़ा 333 पर पहुंचा। प्रापर्टी से जुड़े जानकारों की मानें तो नवरात्रि में प्रदेशभर में 60 हजार से ज्यादा सौदे होने की उम्मीद है।

श्राद्ध पक्ष की वजह से राजधानी समेत प्रदेशभर में प्रापर्टी की खरीद-फरोख्त कम हो गई थी, लेकिन जैसे ही नवरात्रि शुरू हुई, लोग शुभ मुहूर्त में प्रापर्टी की खरीद-फरोख्त करने लगे हैं। इसका नवरात्रि के पहले दिन मध्यप्रदेश में हुई 3 हजार 7 सौ 71 रजिस्ट्री से लगाया जा सकता है। श्राद्ध के दिनों में यह आंकड़ा आधा भी नहीं था। सबसे ज्यादा रजिस्ट्री इंदौर में हुई है। यहां पहले ही दिन 605 रजिस्ट्री हुई। वहीं, भोपाल में 333, जबलपुर में 163, ग्वालियर में 247 और उज्जैन में 162 रजिस्ट्री हुईं।

16.81 करोड़ रुपए की आय
पंजीयन विभाग के अफसरों ने बताया कि नवरात्रि के पहले दिन 3771 रजिस्ट्री हुई और स्टांप ड्यूटी से 16 करोड़ 81 लाख रुपए की आय सरकार को हुई है।

आंकड़ा बढ़ेगा
शुक्रवार को इस आंकड़े में इजाफा होने की उम्मीद है। इसलिए पंजीयन विभाग ने भी इसी हिसाब से तैयारियां कर रखी हैं। आईएसबीटी और परी बाजार स्थित दफ्तरों में काउंटर भी बढ़ाए गए हैं।

पहले से एडवांस बुकिंग, अब होंगी रजिस्ट्री
सर्विस प्रोवाइडर्स का कहना है कि श्राद्ध पक्ष के दौरान ही कई लोगों ने प्रापर्टी की एडवांस बुकिंग कर दी थी। उन्होंने प्रॉपर्टी की बुकिंग के लिए बयाना तो दे दिया था, लेकिन रजिस्ट्री होल्ड करा दी थी। यह रजिस्ट्री अब नवरात्रि में होगी। इसलिए प्रदेशभर में अच्छी संख्या में रजिस्ट्री होगी और इसी हिसाब से सरकार की आय भी बढ़ेगी।

अक्टूबर में 15 हजार से ज्यादा रजिस्ट्री हो चुकी
अक्टूबर के 7 दिनों में प्रदेशभर में 15 हजार से ज्यादा रजिस्ट्री हो चुकी है। स्टांप ड्यूटी के रूप में सरकार की आय करीब 69 करोड़ रुपए हुई। वहीं इस वित्तीय वर्ष में प्रदेशभर में 5 लाख 12 हजार रजिस्ट्री हो चुकी है। जुलाई में गाइडलाइन बढ़ने की संभावनाओं के चलते और महिलाओं को 2% की छूट दिए जाने से लोगों ने जमकर सौदे किए थे। इस कारण वित्तीय वर्ष में आंकड़ा 5 लाख से ज्यादा रहा है।

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