वेटिंग लिस्ट से एडमिशन लेने कतार में लगे स्टूडेंट्स, लॉ पढ़ने में स्टूडेंट्स का बड़ा रुझान
भोपाल
प्रदेश के सभी सरकारी कॉलेज हाउस फुल हो गए हैं। यहां तक प्रवेश लेने के लिए वेटिंग लिस्ट में विद्यार्थियों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। बीयू के विधि विभाग की सीटें फुल हो चुकी हैं। जबकि प्रदेश के निजी लॉ कालेजों की सीटें सूनी पड़ी हुई हैं। भोपाल के आधा दर्जन कॉलेज में एलएलएम की एक भी सीट रिक्त नहीं हैं। प्रदेश में 150 निजी और सिर्फ चालीस सरकारी विधि कॉलेज संचालित हो रहे हैं। उक्त 190 कालेजों में बीएएलएलबी, बीबीएएलएलबी आनर्स, बीएएलएलबी आनर्स, एलएलबी और एलएलएम कोर्स संचालित हो रहे हैं।
सरकारी कॉलेजों की सभी आधा दर्जन कोर्स की सभी 3820 सीटों पर प्रवेश हो चुके हैं। जबकि निजी कालेजों में करीब 15 हजार सीटें हैं, जिसमें अभी तक 9354 सीटों पर प्रवेश हुये हैं। सबसे ज्यादा प्रवेश विद्यार्थियों ने एलएलबी और एलएलएम में लिये हैं। एलएलबी में काफी सीटें कालेज लेवल काउंसलिंग सीएलसी में भरी गई हैं। जबकि एलएलएम की सीटें दूसरे राउंउ की काउसंलिंग में ही फुल हो गई थीं। उन्हें सीएलसी में शामिल होने तक का मौका नहीं दिया गया।
सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय, जिला न्यायालय, लोक अदालत और उपभोक्ता न्यायालय में जज की नियुक्ति, न्यायपालिका में कनिष्ठ न्यायिक सहायक, सहायक न्यायालय सचिव, सहायक अभियोजन, क्लर्क और अन्य लॉ सम्बंधित पद, दो दर्जन से ज्यादा राष्टÑीय स्तर विभाग में प्रबंधन और सलाहकार, अधिवक्ता, डिफेंस सर्विसेज में इंडियन आर्मी और इंडियन नेवी, शिक्षण एरिया, मल्टीनेशनल कंपनियां में कानूनी विशेषज्ञ, पेटेंट पोर्टफोलियो विशेषज्ञ, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क और लीगल एडवाइजर और बैंक में लीगल और क्लेम मैनेजर तथा लीगल एडवाइजर पर आसानी से नौकरी मिल सकती है।
इंजीनियरिंग, एमबीए, बीएड, बीपीएड, बीफार्मा जैसे कोर्स में काफी संख्या में सीटें रिक्त बनी हुई हैं। यहां तक बड़े ब्रांडेड कॉलेज भी अपनी सीटों पर प्रवेश कराने के लिए पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। जबकि प्रदेश में 55 लॉ कालेज एलएलबी संचालित कर रहे हैं। उनकी 7180 सीटों में से 5444 प्रवेश हो चुके हैं। कालेजों में प्रवेश की स्थिति 75 फीसदी रही है। यहां तक भोपाल में संचालित स्टेट लॉ कालेज के कालेज में हाउस फुल लग गया है। कैरियर, जय हिंद, राजीव गांधी, विद्यादायनी का भी एलएलएम फुल हो गया है। जबकि उक्त कालेजों के साथ टीआईटी, सत्य सार्इं सहित की एलएलबी की सीटों स्थिति अच्छी नहीं हैं।
