दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल : कॉरिडोर का काम तेज, देखने लगे स्ट्रक्चर
मेरठ
दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल का काम मेरठ से गाजियाबाद के बीच रफ्तार में आ गया है। हाईवे, रेलवे लाइन, रेलवे फाटक आदि को पार करने के लिए नई तकनीक के प्रयोग से फ्लाईओवर की तरह बड़े स्ट्रक्चर बनाने का काम शुरू हो गया है। गाजियाबाद-मेरठ के बीच वसुंधरा में ऐसा पहला स्ट्रक्चर (स्पेशल स्पैन) तैयार कर लिया गया है। मेरठ में ऐसा ही स्ट्रक्चर परतापुर तिराहे पर फ्लाईओवर के ऊपर तैयार किया जाएगा।
एनसीआरटीसी के अधिकारियों के अनुसार, देश की पहली रैपिड रेल कॉरीडोर के लिए हर संभव नई और चुनौतीपूर्ण तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। यह दिल्ली को गाजियाबाद, मुरादनगर, मोदी नगर और मेरठ के रीजनल नोड्स से जोड़ेगा। 82 किमी. लंबे कॉरिडोर में 70 किमी का भाग एलिवेटेड है और 12 किमी भाग अंडरग्राउंड है।
34-34 मीटर पर हो रहा पिलर निर्माण
एलिवेटेड ट्रैक के निर्माण के लिए एनसीआरटीसी लगभग 34 मीटर की औसत दूरी पर पिलर्स बना रहा है। इसके बाद इन पिलर्स को लॉन्चिंग गैन्ट्री (तारिणी) की मदद से प्री-कास्ट सेगमेंट से जोड़ा जाता है, जिसके लिए एक वायडक्ट स्पैन तैयार किया जाता है। अब तक इन पिलर्स के बीच 37 मीटर की लंबाई तक के वायडक्ट स्पैन बनाए गए हैं।
एनसीआरटीसी साहिबाबाद से गाजियाबाद के बीच ऐसे दो स्पेशल स्पैन स्थापित कर रहा है। इनमें से एक स्पैन वसुंधरा में स्थापित किया गया है, जो रेलवे क्रॉसिंग को पार करने के लिए है। यह 73 मीटर लंबा और 850 टन वजन का है। एनसीआरटीसी चाहती है कि रैपिड रेल से नीचे चलने वाली भारतीय रेलवे, एक्सप्रेस-वे आदि की सेवाएं प्रभावित न हों और निर्माण कार्य समय से पूरा हो।
