जीएसटी काउंसिल से की मांग: सिगरेट, बीड़ी, गुटखा जैसे तंबाकू उत्पादों पर 75 फीसद लगे टैक्स

नई दिल्ली 
चिकित्सकों, अर्थशास्त्रियों के साथ जनस्वास्थ्य समूह ने जीएसटी काउंसिल से तंबाकू उत्पादों पर क्षतिपूर्ति सेस बढाने का अनुरोध किया है ताकि तंबाकू सेवन को हतोत्साहित किया जा सके। काउंसिल की 17 सितंबर को बैठक होने जा रही है। तंबाकू उत्पादों से प्राप्त होने वाला राजस्व महामारी के दौरान संसाधनों की बढ़ी हुई आवश्यकता में अच्छा-खासा योगदान कर सकता है। इनमें टीकाकरण और स्वास्थ्य संरचना को बेहतर करना शामिल है ताकि संभावित तीसरी लहर की तैयारी की जा सके। जन स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से यह फैसला बेहद उपयुक्त होगा।

तंबाकू पर टैक्स में कोई खास वृद्धि नहीं हुई
समूह की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से तंबाकू पर टैक्स में कोई खास वृद्धि नहीं हुई है। ऐसे में सभी तंबाकू उत्पाद पिछले तीन वर्षों के दौरान ज्यादा लोगों की पहुंच में आ गए हैं। कुल टैक्स बोझ (खुदरा मूल्य समेत अंतिम टैक्स के प्रतिशत के रूप में टैक्स) सिगरेट पर सिर्फ करीब 52.7 फीसदी, बीड़ी के लिए 22 फीसदी और अन्य तंबाकू उत्पादों के लिए 63.8 फीसदी है।

तंबाकू का उपयोग कम करने का सबसे प्रभावी तरीका
यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा अनुशंसित टैक्स बोझ के मुकाबले बहुत कम है। सिफारिश तंबाकू उत्पादों के खुदरा मूल्य का कम से कम 75 फीसदी टैक्स रखने की है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार टैक्स में वृद्धि के जरिए तंबाकू की कीमत बढ़ाना तंबाकू का उपयोग कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है। तंबाकू की कीमत इतनी ज्यादा हो कि उस तक पहुंच कम हो जाए तो यह स्थिति लोगों को तंबाकू सेवन छोड़ने के लिए प्रेरित करती है, जो उपयोग नहीं करते उन्हें शुरू करने से रोकती है और जारी रखने वाले उपयोगकर्ताओं में इसकी मात्रा या खपत कम होती है। समूह में शामिल लखनऊ विवि के अर्थशास्त्र विभाग के प्रमुख प्रोफेसर अरविंद मोहन ने कहा कि तंबाकू उत्पादों पर सभी प्रकार के करों एवं सेस को मिलाकर उसके खुदरा मूल्य के 75 फीसदी के बराबर किया जाना चाहिए। वालंट्री हेल्थ एसोसिएशन ऑफ इंडिया की मुख्य कार्यकारी भावना मुखोपाध्याय ने कहा कहा कि करों में बढ़ोत्तरी से तंबाकू उत्पाद महंगे होंगे, जिससे युवा पीढ़ी इसकी चपेट में आने से बचेगी।

तंबाकू गंभीर कोविड संक्रमण के जोखिम बढ़ा देता है
टाटा मेमोरियल हॉस्पीटल में गर्दन के कैंसर के प्रमुख सर्जन डॉ. पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि इस बात के सबूत हैं कि तंबाकू गंभीर कोविड संक्रमण और उसके बाद होने वाली जटिलताओं के जोखिम बढ़ा देता है। धूम्रपान से लंग (फेफड़े) का काम बाधित होता है और शरीर का प्रतिरक्षण कम होता है। कोविड के बाद तंबाकू का उपयोग करने वालों के लिए मौत का जोखिम बढ़ गया है।

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