तनाव तो नहीं पेट की गड़बड़ी का कारण?

तनाव शरीर के अलग-अलग अंगों पर प्रभाव डालता है। पेट भी इससे अछूता नहीं रहता। इरिटेबल बाउल सिंड्रोम पेट की एक आम समस्या है, जो बड़ी आंत पर असर डालती है। होमियोपैथी एवं मेटाफिजिक्स एक्सपर्ट डॉ. रश्मि अरोड़ा के अनुसार आमतौर पर पेट की समस्याओं से परेशान रहने वालों में तनाव एक बड़ा कारण पाया गया है। क्या हर तरह का तनाव रोग का कारण बनता है? उत्तर है नहीं। अप्रत्याशित तनाव, जिससे पहली बार सामना होता है या उस स्थिति में जब व्यक्ति को तनाव से दूर होने का तरीका नहीं सूझता, तब पेट पर इसका असर पड़ता है। नतीजतन कुछ को इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) की समस्या हो जाती है।

तनाव और आइबीएस: मेटा हेल्थ की नजर से आईबीएस या स्पास्टिक कोलोन लंबे अरसे तक चलने वाली बीमारी होती है, जिसमें बड़ी आंत प्रभावित होती है। आईबीएस में आमतौर पर लक्षण के तौर पर पेट में मरोड़ उठना, पेट दर्द, पेट फूलना, गैस और डायरिया या कब्ज की समस्या होती है। आईबीएस से ग्रस्त अधिकतर व्यक्तियों में तनाव ने घर कर लिया होता है या फिर वे बार-बार तनावपूर्ण स्थितियों से दो-चार होते रहते हैं।    
तनाव की यात्रा: इरिटेबल बाउल सिंड्रोम से ग्रस्त व्यक्ति में चिड़चिड़ाहट, अधीरता और क्रोध की अधिकता होती है, जो आंत की सूजन का कारण बनती है। सूजन यानी आकार का बढऩा। क्रोध की अभिव्यक्ति के समय आंखें चौड़ी हो जाती हैं और नाक फूल जाती है। वैसे ही अंदर दबा गुस्सा अंदर के अंग यानी आंत के आकार को बढ़ाता है। मेटा हेल्थ की दृष्टि से इरिटेबल बाउल सिंड्रोम उनको होता है, जिनमें कोई क्रोध दबा हुआ होता है और वह उसे बाहर अभिव्यक्त करने की इच्छा नहीं रखते। रोगी के अवचेतन में यह विचार होता है कि वह इस क्रोध को दूर नहीं कर सकता। मस्तिष्क में आंत संबंधी समस्याएं ब्रेन स्टेम में दर्ज होती हैं और सुलझाई जाती हैं। आईबीएस को बढ़ाने वाली स्थितियां, जिन्हें हम ट्रिगर इवेंट्स कह सकते हैं, व्यक्ति के माहौल में होती हैं। यह शुरू होता है एक बड़े झटके से, फिर उससे तनाव होता है। कई बार तनाव की पहली स्थिति खत्म नहीं होती कि दूसरी शुरू हो जाती है और इस तरह आईबीएस पनपता है।    

उपचार का तरीका    : आईबीएस से ग्रस्त लोगों का सबसे बड़ा विश्वास यह होता है कि अगर उन्होंने उस विशिष्ट स्थिति को अभिव्यक्त किया तो उनके सामान्य जीवन में समस्याएं आ जाएंगी। लोग उनके बारे में नकारात्मक सोच सकते हैं। मेटा हेल्थ अप्रोच के माध्यम से लंबे समय से पेट की गड़बड़ी से जूझ रहे लोगों के ऐसे नकारात्मक अनुभवों की खोज की जाती है। उस अनुभव से संबंधित उनके नजरिए को संकीर्ण की बजाय विस्तार देने की कोशिश की जाती है, ताकि वे उस अनुभव से संबंधित अपने गुस्से या भावनाओं को  प्रदर्शित कर सकें। उनके भय को खत्म कर उन लोगों के आत्मविश्वास को मजबूत बनाने की कोशिश की जाती है। यह कुछ महीनों तक चलने वाली प्रक्रिया है, जिसमें थेरेपी और दवाई एक साथ चलते हैं।

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