छोटी सांसें यानी ऑक्सीजन की कमी

खिलाड़ी व नियमित व्यायाम करने वालों को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर नहीं जानते कि खून में पर्याप्त ऑक्सीजन का अच्छी फिटनेस से कितना गहरा संबंध है। शरीर में स्वस्थ कोशिकाएं एरोबिक होती हैं यानी उन्हें बढऩे के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन की जरूरत होती है। जिस तरह बिना ऑक्सीजन आग नहीं जलती,  उसी तरह हमारी कोशिकाएं भी बिना ऑक्सीजन ऊर्जाविहीन हैं। खून में ऑक्सीजन की कमी को हाइपोक्सिमिया कहते हैं। ऐसा दमा, फेफड़े की बीमारी व शरीर में लोहतत्व की कमी पर भी होता है। सांसें छोटी आना, बेचैनी, सिरदर्द, उच्च रक्तचाप और त्वचा का नीला पडऩा भी खून में ऑक्सीजन की कमी से जुड़ा है। धमनियों में से खून के नमूने की जांच करके ऑक्सीजन का स्तर जांचा जाता है।

सेहत का मामला है
खून में पर्याप्त ऑक्सीजन होने से मेटाबॉलिक दर में भी वृद्धि होती है। वह दर, जिससे शरीर भोजन को ऊर्जा में बदलता है। खून में पर्याप्त ऑक्सीजन से कोशिकाओं में टॉक्सिन्स जमा नहीं होते। इतना ही नहीं, शरीर की एरोबिक क्षमता अधिक होने पर हृदय मजबूत होता है, फेफड़े ढंग से काम करते हैं और इम्युनिटी में सुधार होता है। अधिक श्रम के व्यायाम के लिए श्वसनतंत्र की मजबूती जरूरी है।

गहरे श्वास लेना है जरूरी
ऑक्सीजन सांस के जरिए शरीर में जाती है। हवा से ऑक्सीजन को अलग करने का काम फेफड़े करते हैं। ऑक्सीजन फेफड़ों के पास से रक्त नलिकाओं तक पहुंचती है और उसके बाद खून के जरिए कोशिकाओं तक। ऑक्सीजन का सही स्तर बनाए रखने के लिए जरूरी है गहरे श्वास लेना। अधिकतर रक्त नलिकाएं फेफड़ों के निचले हिस्से में होती हैं। छोटे श्वास लेने पर हवा केवल फेफड़ों के ऊपरी हिस्से तक ही पहुंचती है।

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