यूएनडीपी के मुताबिक अफगानिस्तान सार्वभौमिक गरीबी के कगार पर खड़ा

संयुक्त राष्ट्र
संयुक्त राष्ट्र विकास एजेंसी (यूएनडीपी) के मुताबिक, संकटग्रस्त अफगानिस्तान सार्वभौमिक गरीबी के कगार पर खड़ा है। स्थानीय समुदायों और उनकी अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए फौरन कदम नहीं उठाए गए तो अगले साल मध्य तक अफगानिस्तान में गरीबी दर 98 फीसदी तक पहुंच जाएगी।

एजेंसी के मुताबिक, तालिबान के कब्जे ने बीते 20 वर्षों में हासिल आर्थिक लाभों को खतरे में डाल दिया है। यूएनडीपी ने मौजूदा हालात में चार परिदृश्य बताए हैं। इनमें जून 2022 से शुरू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 3.6 फीसदी से 13.2 फीसदी के बीच गिरावट का अनुमान है।

हालांकि, यह संकट की गंभीरता और विश्व के तालिबान से संबंधाें पर निर्भर करेगा। अशरफ गनी सरकार के पतन से पहले जीडीपी में चार फीसदी वृद्धि का अनुमान जताया जा रहा था लेकिन ताजी भविष्यवाणी एकदम उलट है।

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