प्रदेश के सहकारी बैंकों में हो रही गड़बड़ियां रोकेगा अपेक्स बैंक का सॉफ्टवेयर
भोपाल
प्रदेशभर के जिला सहकारी बैंकों और उनसे जुड़ी सहकारी बैंक शाखाओं में होंने वाले गड़बड़ियों की जानकारी पता करने के लिए अब लंबा इंतजार नही ंकरना पड़ेगा ना ही आॅडिट दल की रिपोर्ट का इंतजार करना पड़ेगा। किसी भी सहकारी बैंक शाखा में आर्थिक अनियमितता होते ही भोपाल में बैठे अफसरों को इसकी तत्काल जानकारी मिल जाएगी और इससे जुड़े तमाम अफसरों को सचेत कर इसे रोका जा सकेगा। इसके लिए भोपाल के अपेक्स बैंक में एक सॉफ्टवेयर लगाया जाएगा और प्रदेश भर की सहकारी बैंको और उनकी शाखाओं को आॅनलाईन जोड़ा जाएगा। सहकारी बैंकों के आॅडिट की प्रक्रिया में बदलाव किया जाएगा। इसके लिए फार्मेट चेंज किया जाएगा ताकि वित्तीय अनियमितताओं पर शिकंजा कसा जा सके। गड़बड़ियां नहीं हो इसके उपाय भी किए जाएंगे। प्रकिया को ंआॅनलाइन भी किया जाएगा।
सभी जिला सहकारी बैंक और उनकी शाखाओं को अपैकस बैंक से आॅनलाईन जोड़ा जाएगा। एक सॉफ्टवेयर अपैक्स बैंक में लगेगा। उससे प्रदेशभर की सहकारी बैंकों के वित्तीय लेन-देन पर नजर रखी जाएगी। किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पर यहां तत्काल पता चल सकेगा। बैंको को कोर बैंकिंग से जोड़ा जाएगा, आईटी टूल्स का उपयोग किया जाएगा। तकनीकी प्रक्रियाओं में बदलाव कर यहां के सॉफ्टवेयर को इतना सक्षम बनाया जाएगा कि तत्काल गड़बड़ी का पता चले और बैंक को अलर्ट भी भेजा जा सके ताकि समय पर उस गड़बड़ी को रोका जा सके।
अभी किसानों के बैंक खातों के लिए तीन लाख के ट्रांजेक्शन की लिमिट तय है लेकिन कई बार इनमें एक साथ अधिक ट्रांजेक्शन हो जाते है और काफी बाद में इसका पता चलता है। बैंक खातों में अचानक हो रहे बड़े ट्रांजेक्शनों के जरिए ही बड़ी आर्थिक अनियमितताओं को अंजाम दिया जाता है। इसी तरह कुछ सस्पैंड एकाउंट में भी कई बार अधिकारी राशि ट्रांसफर कर देते है। कई बार बैंक खातों में ज्यादा भुगतान हो जाता है। किसी के खाते की राशि किसी और के खाते में ट्रांसफर हो जाती है। कई बार आॅनलाईन ट्रांजेक्शन दिखाकर कर्ज वसूली बता दी जाती है और तत्काल ही नये कर्ज की राशि जारी कर दी जाती है। इन सभी आर्थिक अनियमितताओं की जानकारी खाताधारक की शिकायत पर पता चलती है या किसी तरह का आर्थिक अपराध दर्ज होने पर मामला सामने आता है।
सहकारी बैंकों में गबन-घोटाले रोकने हर जिले में चार्टर्ड एकाउंटेंट और उनकी टीम की तैनाती की जाएगी। इन सभी की जिम्मेदारी होगी कि बैंको में होने वाले गबन-घोटाले पर नजर रखे और तत्काल उसे पकड़े ताकि ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके और इनके दोषियों की धरपकड़ कर उनसे समय पर वसूली की जा सके। सहकारी बैंकों का सालाना आॅडिट कराया जाता है। इससे साल में एक बार ही आॅडिट होता है। इससे गड़बड़ियों को तत्काल पकड़ पाना मुश्किल होता है। अब बैंकों के आॅडिट को दो और तीन स्तरीय किया जाएगा। इसके अलावा अब सालाना एक बार आॅडिट कराने की जगह इसे टुकड़ों में भी कराने की तैयारी है। हर बैंक में इसके लिए अधिकारी तय होंगे और वे अपने स्तर पर भी वित्तीय लेन-देन का आॅडिट करेंगे। इसके बाद चार्टर्ड एकाउंटेंट और सहकारिता विभाग के अफसर भी इस प्रक्रिया से जोड़े जाएंगे। आॅडिट का फार्मेट बदलेगा तो गड़बड़ियों पर शिकंजा कस सकेगा।
