DFO ने मंत्री को गुमराह कर वनपाल व वन रक्षकों के मनमर्जी से कर दिए ट्रांसफर
छतरपुर
छतरपुर डीएफओ हमेशा से ही अपनी कार्यशैली को लेकर मीडिया की सुर्खियों में बने रहते है। बीते माह इनकी कार्यशैली को लेकर समस्त रेंज अफसरों ने सीसीएफ छतरपुर को ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन में उल्लेख गया किया था कि डीएफओ के द्वारा रेंज अफसरों के साथ तानाशाही पूर्वक रवैया अपनाते है। इनको अपनी कार्यशैली बदलना होगी नहीं तो रेंज अफसर सामूहिक अवकाश पर जाने के लिए बाध्य होंगे। रेंज अफसरों के विरोध के बाबजूद भी डीएफओ की कार्यशैली में कोई बदलाव नजर नहीं आ रहा है। बीते माह प्रभारी मंत्री के अनुमोदन के उपरांत व स्वयं के व्यय पर आधा सैकड़ा से अधिक वन विभाग के वनपालों व वनरक्षकों के तबादले जिले में किये गये है।
डीएफओ ने अपने आदेश क्रमांक 292 में कर्मचारियों के ट्रांसफर प्रशासकीय व स्वयं के व्यय पर दिनांक 07/08/2021 को ट्रांसफर सूची जारी की हैं। जिसमें सामान्य प्रशासन विभाग बल्लभ भवन के आदेश क्रमांक एफ 6-2021/1एफ/9 स्थानांतरण नीति वर्ष 2021 के प्रावधानों के नियमों का पालन नहीं किया गया है। *स्थानांतरण नियमावली में उल्लेख किया गया है कि ट्रांसफर के लिए निर्धारित आखरी तिथि पर ट्रांसफर सूची गाड की साईट पर मेल की जानी चाहिए, अन्यथा आदेश शून्य माने जाएगे। इनके द्वारा ट्रांसफर सूची को गाड की मेल आईडी पर नहीं डाला गया है,* जिले में रेसियो के आधार पर ट्रांसफर नहीं हुए है।
इन नियमों का नहीं किया गया पालन
वर्ष 2021 की राज्य व जिला स्तर की स्थानांतरण नीति में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि जिले में एक से लेकर दो सौ तक कर्मचारी पदस्थ है तो 20 प्रतिशत ही ट्रांसफर किए जो सकते है। जबकि 201 से 2000 तक 10 प्रतिशत ट्रांसफर किये जा सकते है। 2 हजार से अधिक होने पर 5 प्रतिशत ही ट्रांसफर किये जा सकते है। छतरपुर जिले में करीब से अधिक कर्मचारी होने के बाबजूद 20 प्रतिशत से भी अधिक ट्रांसफर कर दिए गये है जो कि ट्रांसफर नीति के विपरीत है। सूत्र बताते है कि प्रभारी मंत्री उक्त जिले का रेसियों अनुमोदन उपरांत नहीं बताया गया, कहीं न कहीं यह गुमराह की श्रेणी में आता है। स्वयं के व्यय पर या प्रशाकीय स्तर पर किए गये स्थानांतरण की सूची अलग-अलग जारी की जाना होती है। लेकिन जिले में ऐसा नहीं किया गया है।
कोरोना रोकथाम के लिए नहीं भेजी थी तेंदू पत्ता फड़ों पर पर्याप्त सामग्री, अब प्रबंधकों से मांगी जा रही पावतीयां
गौरतलब है कि कोरोना की दूसरी लहर कहर बरपा रही थी, उसी समय तेंदू पत्ते का संग्रहण किया जा रहा था। जिले में कई सैकेड़ों फड़ों पर हजारों मजदूर तेंदू पत्ता ले जा रहे थे, मजदूरों को फड़ो पर तेंदू पत्ता गड्डी पहुंचाना होती है। जिसको गिना जाता है, संग्रहण की प्रक्रिया में काफी समय लगता है मजदूरों को एक साथ ही फड़ों पर रहना पड़ता है। कोरोना की रोकथाम के लिए भोपाल से फड़ों पर सामग्री पहुंचाने के निर्देश जारी किए गये थे, परंतु छतरपुर डीएफओ के द्वारा एक फड़ पर एक लाईबॉय साबुन व एक सैनेटाईजर की वाटल ही प्रदान की गई थी। सूत्रों से पता चला है कि अब तेंदू पत्ता संग्रहण करने वाली समितियों के प्रबंधकों से डीएफओ के द्वारा पावर्तीयां मांगी जा रही है।
