RGPV: परीक्षा नियंत्रक की कुर्सी खाली, शासन ने ठंडे बस्ते में डाले एग्जाम कंट्रोलर के आवेदन
भोपाल
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक की कुर्सी पर सवार होने के लिए सात प्रोफेसर्स कतार में थे, इसमें से एक प्रोफेसर बाहर हो गए हैं। अब मैदान में सिर्फ आधा दर्जन प्रोफेसर ही दौड़ में रह गए हैं, लेकिन शासन आवेदन लेकर खामोश बैठ गया है। उन्हें नियुक्ति को लेकर शासन में कोई सुगबुगाहट नहीं दिखाई दे रही है।
आरजीपीवी में परीक्षा नियंत्रक बनने के लिए सात प्रोफेसरों ने शासन को आवेदन भेजे हैं। इसमें एक प्रोफेसर के आवेदन को निरस्त कर दिया है। क्योंकि उन्होंने अपनी प्रोफाइल को सही तरीके से तैयार कर शासन को नहीं भेजी है।
प्रोफेसर होने के बाद उन्होंने अपनी आइडेंटिश्ँ सही तरीके शासन के सामने प्रस्तुत नहीं की, जिसके कारण उनके आवेदन को निरस्त कर दिया गया है। जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में पदस्थ वीरेंद्र कुमार नियंत्रक की दौड़ में सबसे आगे हैं। क्योंकि उनके पास तकनीकी शिक्षा संचालक का अनुभव है।
वहीं वर्तमान में परीक्षा नियंत्रक प्रभारी प्रभात पटेल ने आवेदन कर शासन का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया है, लेकिन शासन उन्हें नियंत्रक बनाने तैयार नहीं हैं। क्योंकि उनकी कार्यशैली के संबंध में पूरा विभाग परिचित है। इसके बाद आरजीपीवी प्रोफेसर आलोक चौबे, जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में पदस्थ प्रोफेसर प्रशांत जैन, संचालनालय में पदस्थ डीके अग्रवाल सहित सागर इंजीनियरिंग कॉलेज में पदस्थ एक प्रोफेसर ने आवेदन किया है। शासन सभी की स्कू्रटनी कर किसी एक को प्रतिनियुक्ति पर आरजीपीवी में परीक्षा नियंत्रक के रूप में पदस्थ करेगा।
बाहरी आवेदकों को आवेदन करने का सिर्फ कारण उनका भोपाल में बने रहना है। क्योंकि वे भोपाल छोडकर किसी भी दूसरे शहर में जाना पसंद नहीं करते हैं। इसलिए बाहरी प्रोफेसर प्रतिनियुक्ति पर भोपाल आने के लिए आवेदन करते रहते हैं। यही कारण कि पूर्व डीटीई वीरेंद्र कुमार, प्रशांत जैन, प्रभात पटेल और डीके अग्रवाल परीक्षा नियंत्रक बनने ज्यादा कवायद कर रहे हैं।
