प्रदेश के विश्वविद्यालय में UGC के नियमों से होगी कुलपतियों की नियुक्तियां
भोपाल
प्रदेश के विश्वविद्यालय में यूजीसी 2018 नियमों के मुताबिक कुलपति नियुक्तियों की नियुक्तियां होंगी। यूजीसी के नियमों को एडोप करने एक कमेटी गठित होगी, जिसकी अनुशंसा के बाद कुलपतियों की नियुक्यिां की जाएंगी। वहीं अब कालेजों को एक बार में विवि तीन साल की मान्यता देगा। उन्हें हरेक साल आवेदन नहीं करना होगा। उच्च शिक्षा विभाग अब तीन विवि के कुलपतियों को कमेटियों में नहीं रखेगा।
जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर की कुलपति संगीता शुक्ला द्वारा स्थायी समिति की अध्यक्षता में पास किये गये प्रस्ताव को समन्वय समिति में खारिज कर दिया गया है। अब कुलपतियों की नियुक्तियां यूजीसी के नियमों के मुताबिक की जाएंगी। समिति ने कालेज प्रोफेसर को कुलपति और सर्च कमेटी में भागीदारी नहीं करने का प्रस्ताव पास किया था, जिसे राज्यपाल मंगुभाई छ पटेल से पारित कराने समन्वय समिति में रखा गया। जहां कई प्रोफेसरों ने प्रस्ताव का विरोध किया। इस दौरान कुलपति शुक्ला भावुक हो उठी और उन्होंने कहाकि वे ऐसा नहीं चाहती हैं। तब अंत में यूजीसी के नियमों के मुताबिक कुलपतियों की नियुक्ति करने का निर्णय लिया गया। अब एक कमेटी गठित की जाएगी, जो यूजीसी के नियमों को देखकर अनुशंसा करेगी। इसके बाद नये नियमों के तक प्रदेश के विवि में कुलपतियों की नियुक्तियां की जाएंगी। इसमें कालेज और विवि के प्रोफेसर कुलपति बन पाएंगे।
ईसी के बाहरी सदस्यों को मिलेंगे पांच-पांच हजार
प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कार्यपरिषद के हरेक बाहरी सदस्य को पांच-पांच हजार रुपये का मानदेय दिया जाएगा। जबकि अन्य शासकीय और विवि के सदस्यों को तीन-तीन हजार रुपये ही दिया जाएगा। क्योंकि बाहरी सदस्यों के पास कोई और कार्य का किसी भी प्रकार का भुगतान नहीं होता है। जबकि अन्य सदस्यों के पास मासिक वेतन शासन द्वारा पेय होता है।
बीयू कुलपति नहीं कर पाएंगे सदस्यता
कुलपति नियुक्ति को लेकर बने प्रस्ताव पर कुलपति संगीता शुक्ला के साथ बीयू कुलपति आरजे राव और डीएविवि कुलपति रेणू जैन ने सहमति दी थी। इसीलिये एक कुलपति ने बैठक में मौजूद उच्च शिक्षामंत्री मोहन यादव ने तीनों कुलपतियों को विभागीय किसी भी बैठक में सदस्य के रूप में नहीं रखने के लिये कहा है। इसे लेकर मंत्री यादव ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। अब उक्त तीनों कुलपति विभाग की किसी भी समिति में शामिल होने के लिये ब्लैक लिस्टेड कर दिये गये हैं। मंत्री यादव ने कहाकि विश्वविद्यालय रोजगार परक कार्यक्रम प्रारंभ कर अपनी क्षमता विकसित करें। सभी विवि संबद्धता शुल्क और लगने वाले दंड में एकरूपता होना चाहिए। रिक्त पदों पर भर्ती अभियान चलाएं। विवि पेंशन केस में कोर्ट के आदेश का इंतजार नहीं करें। कुलपति उन्हें जल्द निराकृत करें। अनुकंपा नियुक्ति प्रकरण को व्यक्तिगत रुचि लेकर हल करें और सभी विवि आय के स्त्रोत बढ़ाकर व्यय में भी उदारता दिखाएं।
