नए महासचिव पर दांव खेल सकते हैं सिद्धू

चंडीगढ़
पंजाब कांग्रेस संगठन को मज़बूत और विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सत्ता पर दोबारा क़ाबिज होने के लिए पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष लगातार एक पर एक नए फ़ैसले लेते जा रहे हैं। नवजोत सिंह सिद्धू ने आज अपने लिए दो मीडिया सलाहकार की नियुक्ति की है। इससे पहले उन्होंने अपने लिए चार सलाहकार नियुक्त किए थे। हाल ही में उन्होंने भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान परगट सिंह को प्रदेश कांग्रेस का महासचिव नियुक्त किया है। 
विधायक मदनलाल जलालपुर ने कहा कि कांग्रेस अपनी तैयारी में जुटी हुई है। 'विपक्ष का काम है आरोप लगाना' विधायक मदन लाल जलालपुर ने कहा कि कांग्रेस के विधायक अपने-अपने हल्के में काफ़ी सक्रिय हैं। उनसे जब ये पूछा गया कि विपक्ष आप पर रेत माफिया, नकली शराब बिकवाने का आरोप लगा रहा है। इस पर क्या कहना चाहेंगे तो उन्होंने कहा कि हमारा काम बोलता है हमने क्षेत्र में काफ़ी विकास किया है इसलिए विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं तो झूठे आरोप लगा रही है।
कश्मीर पर बयान देकर घिरे सिद्धू के सलाहकार मालविंदर, कांग्रेस ने भी झाड़ा पल्ला प्रोग्रेस रिपोर्ट से दिख जाएगा विकास विधायक मदन लाल जलालपुर ने कहा कि कांग्रेस के विधायक का प्रोग्रेस रिपोर्ट देखने से अंदाज़ा मिल जाएगा कि हमलोगों ने कितना विकास किया है। विपक्षी पार्टी का काम है आरोप लगाना और हमारा काम है विकास करना, इसी सिद्धांतों पर हम लोग काम कर रहे हैं। वहीं उन्होंने कहा कि परगट सिंह काफी अच्छे नेता हैं उन्हें प्रदेश कांग्रेस कमेटी का महासचिव बनाने के साथ ही पंजाब में कांग्रेस के पुनर्गठन की शुरुआत हो गई है। विधायक परगट सिंह के के महासचिव बनने से दोआबा कांग्रेस के समीकरण बदलने लगे हैं। 

उन्हें दोआबा के कद्दावर नेताओं में शुमार किया जा रहा है। परगट को दोआबा का इंचार्ज बनाने की तैयारी सियासी जानकार बताते तजुर्बे के ऐतबार से अगर देखा जाए तो परगट सिंह को संगठन का तजुर्बा नहीं है, लेकिन पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने विधायक परगट सिंह का कद बढ़ाकर उन्हें दोआबा का इंचार्ज बनाने की तैयारी शुरू कर ली है। आपको बता दें कि दोआबा ही ऐसा इलाका है, जिसके बलबूते पर कोई भी राजनीतिक पार्टी सरकार बनाने में कामयाब हो जाती है। दोआबा में होशियारपुर, नवांशहर, कपूरथला और जालंधर का इलाका है। दोआबा में कांग्रेस ने 2002 में प्रचंड बहुमत हासिल किया था जिसके बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार सत्ता में आई थी। वहीं दोआबा में 2007 और 2012 में शिरोमणि अकाली दल और भाजपा की लहर में कैप्टन की सरकार चली गई और बादल की सरकार सत्ता में आई। 

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