दैनिक जीवन में अपने जोड़ों की देखभाल कैसे करें, सेमिनार में डॉ. प्रवीण ने बताए राज

रायपुर
श्रेयम स्पेशिलिटी आथोर्पेडिक एंड रिहैबिलिटेशन सेन्टर अहमदाबाद के प्रबंध निदेशक डॉ.प्रवीण सारडा ने छत्तीसगढ़ चेम्बर आॅफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज द्वारा आयोजित स्वास्थ्य संबंधी सेमिनार में  दैनिक जीवन में अपने जोड़ों की देखभाल कैसे करें इसके बारे में व्यापारियों को बारीकी से जानकारी दी और बताया कि खड़े होते समय हमें ज्यादा झुकना नहीं चाहिए। इस दौरान कंधे व कोहनी के विशेषज्ञ मुख्य अतिथि-डॉ.पुर्णेंन्दु सक्सेना, आथोर्पेडिक सर्जन व्हीवाय हास्पीटल, विशिष्ट अतिथि – डॉ. आनंद जोशी एवं डॉ. श्रीधर राव, आथोर्पेडिक सर्जन, व्ही वाय हास्पीटल रायपुर उपस्थित थे।

डॉ.प्रवीण सारडा ने अपना व्यक्तिगत परिचय देते हुए कहा कि वे वर्तमान में श्रेयम स्पेशिलिटी आथोर्पेडिक एंड रिहैबिलिटेशन सेन्टर अहमदाबाद के प्रबंध निदेशक हैं। एमबीबीएस और एम.एस. (आॅर्थो) सिविल अस्पताल अहमदाबाद से 2002 में स्वर्ण पदक के साथ, लंदन, फ्रांस और जर्मनी में एक वर्षीय विशेषज्ञ अपर लिम्ब फेलोशिप सहित उच्च प्रशिक्षण के लिए यूके गये और भारत वापस आये। डॉ.प्रवीण सारडा ने प्रोजेक्टर के माध्यम से दैनिक जीवन शैली में आसन, आहार, एवं व्यायाम संबंधी जानकारी दी कि हमें खड़े होने के समय किस प्रकार से खड़े होना, चलना एवं किस प्रकार बैठना चाहिये एवं किस प्रकार का आहार हमारे शरीर के लिये उत्तम है एवं नियमित तौर से व्यायाम करना चाहिये।डॉ. सारडा ने कहा कि खड़े होते समय हमें ज्यादा झुकना नहीं चाहिये, हमें सीधा खड़े होना चाहिये। वाकिंग करते समय पहनने वाला जूता आरामदायक होना चाहिये। जूते की नोक ज्यादा नुकीला नहीं होना चाहिये और न ही ऊंचे हिल वाला जूता-सैंडिल पहनना चाहिये।

आफिस में कंप्यूटर में काम करते समय कुर्सी इतना पास न हो कि कोहनी पर भार पड़े। कंप्यूटर में काम करते समय एक ही पोजीशन में नहीं बैठना चाहिये। ज्यादा देर तक एक ही पोजीशन में बैठने से कमर एवं कंधे पर दर्द होने लगता है। लंबे समय तक ड्राइव करने से भी कमर एवं कंधे पर दर्द होता है, इसलिये कमर एवं सीट के बीच पतला तकिया रखना चाहिये। डॉ. सारडा ने आहार(डाइट) के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि संतुलित आहार (बैलेंस डाइट) एक ऐसा आहार है जिसमें कुछ मात्रा और अनुपात में विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ होते हैं ताकि कैलोरी, प्रोटीन, खनिज, विटामिन और वैकल्पिक पोषक तत्वों की आवश्यकता पर्याप्त हो। पारंपरिक खाद्य पदार्थ (टेऊडिशनल डाइट) ऐसे खाद्य पदार्थ और व्यंजन हैं जो पीढि?ों से चले आ रहे हैं या जिनका सेवन कई पीढि?ों से किया जा रहा है। पारंपरिक खाद्य पदार्थ और व्यंजन प्रकृति में सहज उपलब्ध है, और राष्ट्रीय व्यंजन, क्षेत्रीय व्यंजन भी पोषक आहार देने में सहायक हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि सुबह 8 से 9 बजे तक का धूप लेने से प्राकृतिक रूप से विटामिन डी देता है। कोर एक्सरसाइज के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि जो बिना सहारे के इस्तेमाल करते हैं, जैसे पुश-अप्स, सिट-अप्स और एब्डोमिनल क्रंचेज। ये व्यायाम आपकी पीठ के निचले हिस्से, कूल्हों, पेट और श्रोणि को बेहतर संतुलन और स्थिरता के लिए एक साथ काम करने के लिए मजबूत और प्रशिक्षित करते हैं। इसके पश्चात् सेमिनार में प्रश्नोत्तर के अंतर्गत उपस्थित सदस्यों ने डॉ. सारडा से अपने स्वास्थ्य संबंधी प्रश्न पूछा जिसका उत्तर उन्होंने दिया।

मुख्य अतिथि डॉ.पूर्णेन्दु सक्सेना ने कहा कि हमारी कोशिश रहती है कि स्वास्थ्य संबंधी जो कुछ अप टू डेट होता है उसे आप लोगों के समक्ष रखा जाये। व्ही वाय हास्पीटल के माध्यम से हम आम जनता को जानकारी देते रहते हैं। चेम्बर प्रदेश अध्यक्ष अमर पारवानी ने अपने उद्बोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ चेम्बर व्यापारिक हित के साथ ही सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता का निर्वहन करता है। उन्होंने सभी डॉक्टरों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आपने स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देने हेतु अपना अमूल्य समय हमें दिया इसके लिये धन्यवाद। पारवानी ने कहा कि अगर हम बैक टू बेसिक में आते हैं और अपने रहन-सहन, खान-पान का ध्यान रखते हैं तो हमें कोई दवाई एवं आपरेशन की जरूरत कम पड़ेगी। सेमिनार के अंत में सभी डॉक्टरों को चेम्बर की ओर से स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

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