स्टडी को DCGI ने दी मंजूरी: भारत कोविशील्ड और कोवैक्सीन टीकों की मिक्सिंग में एक कदम और आगे बढ़ा 

नई दिल्ली
कोरोना वायरस के दो टीकों की मिक्सिंग पर भारत एक कदम और आगे बढ़ गया है। अब ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने भी कोवैक्सीन और कोविशील्ड वैक्सीन की मिक्सिंग पर स्टडी के लिए अपनी मंजूरी दे दी है। यह स्टडी और क्लिनिकल ट्रायल करने की जिम्मेदारी वेल्लोर के क्रिश्चन मेडिकल कॉलेज को मिली है। बैठक के दौरान एक्सपर्ट कमेटी ने सीएमसी, वेल्लोर को चौथे फेज के क्लिनिकल ट्रायल किए जाने की मंजूरी देने का सुझाव दिया। इस ट्रायल में 300 स्वस्थ वॉलंटियर्स पर कोविड-19 की कोवैक्सीन और कोविशील्ड वैक्सीन की मिक्सिंग के प्रभाव जांचे जाएंगे। इस स्टडी का मकसद यह जानना है कि क्या किसी व्यक्ति के पूर्ण टीकाकरण के लिए उसे एक खुराक कोवैक्सीन और दूसरी खुराकी कोविशील्ड की दी जा सकती है। 

यह प्रस्तावित स्टडी हाल ही में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी (ICMR) द्वारा की गई स्टडी से अलग है। आईसीएमआर ने उत्तर प्रदेश के उन लोगों पर शोध किया था, जिन्हें गलती से दो अलग-अलग कोरोना रोधी टीकों की खुराक दे दी गई थी।  इस स्टडी के आधार पर आईसीएमआर ने कहा था कि कोवैक्सीन और कोविशील्ड को मिलाकर दिए जाने से बेहतर परिणाम दिखे हैं और इससे कोविड-19 के खिलाफ अच्छी इम्यूनिटी भी बनी है। यह स्टडी मई और जून के बीच उत्तर प्रदेश के लाभार्थियों पर की गई।

इस अध्ययन का उद्देश्य यह आकलन करना है कि क्या टीकाकरण पाठ्यक्रम को पूरा करने के लिए किसी व्यक्ति को दो अलग-अलग एक कोविशील्ड और कोवैक्सिन वैक्सीन शॉट दिए जा सकते हैं। यह प्रस्तावित अध्ययन भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा वैक्सीन प्राप्त करने वालों के एक समूह पर किए गए हालिया अध्ययन से अलग होगा, जिन्हें इस साल की शुरुआत में उत्तर प्रदेश में गलती से विभिन्न corona टीकों की खुराक दी गई थी।

7 अगस्त को, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के वैज्ञानिकों ने एक प्रीप्रिंट पेपर के माध्यम से एक दिलचस्प दावा किया। दरअसल भारत के कोरोना वैक्सीन ड्राइव में दो प्रमुख टीकों कोवैक्सिन और कोविशील्ड का मिश्रण न केवल सुरक्षित हो सकता है, बल्कि यह भी हो सकता है कि ये लोगों में अधिक प्रतिरक्षा प्रणाली विकसित करें।

अध्ययन का नेतृत्व ICMR-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पुणे की अधिकतम नियंत्रण सुविधा की वैज्ञानिक प्रज्ञा यादव ने किया था। उन्होंने और उनके सहयोगियों ने मई 2021 में उत्तर प्रदेश के एक टीकाकरण केंद्र में कोविशील्ड की पहली खुराक और गलती से कोवैक्सीन की दूसरी खुराक प्राप्त करने वाले 18 लोगों के बीच Coronavirus के एंटीबॉडी के अपने विश्लेषण के परिणामों का आंकलन किया। जिसमे दावा किया जा रहा है कि दोनों वैक्सीन के डोज लिए लोगों कि प्रतिरक्षा प्रणाली तेजी से विकसित हुई है।

संसद में सरकार ने क्या कहा था
तीन अगस्त को सरकार ने कहा था कि कोरोना वायरस रोधी टीकों की दोनों खुराक मिलाने के बारे में अब तक कोई सिफारिश नहीं की गई है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री भारती प्रवीण पवार ने राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कोविड-19 रोधी टीके हाल में विकसित किए गए हैं। विभिन्न टीकों को मिलाने और मिश्रित टीकों को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण तथा अध्ययन शुरुआती अवस्था में हैं।

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