आखिर क्यों शेरशाह के सेट् पे सब लगे रोने ?

पिछले काफी दिनों से करगिल युद्ध के हीरो परमवीर चक्र विजेता शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा की बायॉपिक (Captain Vikram Batra Biopic) 'शेरशाह' (shershah) काफी चर्चा में है। इस फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा (Siddharth Malhotra) और कियारा आडवाणी (Kiara Advani) लीड रोल में नजर आएंगे। अब यह फिल्म रिलीज के लिए तैयार है और इसे 12 अगस्त को रिलीज किया जा रहा है। इस फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा ने विक्रम बत्रा और कियारा आडवाणी ने उनकी मंगेतर डिंपल चीमा का किरदार निभाया है।

कियारा ने बताया कैसे फिल्माया गया सीन

इस फिल्म के क्लाइमैक्स सीन में शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा का अंतिम संस्कार दिखाया गया है। सीन में कैप्टन बत्रा की मंगेतर के किरदार में कियारा आडवाणी भी नजर आएंगी। इस इमोशनल सीन के बारे में बात करते हुए डायरेक्टर विष्णु वर्धन ने कहा कि इसे कियारा आडवाणी को एक ही टेक में निकालना था क्योंकि यह बेहद इमोशनल कर देने वाला सीन है। कियारा ने इस सीन के बारे में बताया, 'हम इस सीन को वहीं शूट कर रहे थे जहां पालमपुर में कैप्टन बत्रा का अंतिम संस्कार हुआ था। जब कैप्टन शहीद हुए थे तो पूरा शहर उनकी बहादुरी को सलाम करने के लिए अंतिम संस्कार में शामिल हुआ था। फिर से ऐसा दिखाने के लिए हमारे सेट पर बहुत सारे जूनियर आर्टिस्ट मौजूद थे।'

सीन देखकर सभी रोने लगे

कियारा ने आगे कहा, 'उस दिन सेट पर कैप्टन बत्रा के जुड़ावां भाई विशाल बत्रा भी मौजूद थे। मैं बहुत इमोशनल हो रही थी इसलिए मैंने विष्णु सर से कहा कि मैं केवल एक ही टेक लेना चाहती हूं। इसके लिए उन्होंने मेरे इमोशंस को कैप्चर करने के लिए क्लोजअप शॉट लिया। जब कैमरा मुझ पर फोकस था और मैं इमोशनल हो रही थी तब मैं जूनियर आर्टिस्टों के साथ ही फिल्म के पूरे क्रू को सिसकते हुए सुन सकती थी। सीन केवल मुझपर फिल्माया जा रहा था मगर उन सभी की आंखों में आसूं थे। उस समय हम सब के भीतर कैप्टन बत्रा के बलिदान के लिए बहुत सम्मान भरा हुआ था। ऐसा लगा ही नहीं कि हम ऐक्टिंग कर रहे हैं बल्कि ऐसा लगा कि हम 11 जुलाई 1999 के दिन को दोबारा जी रहे हैं।'

इसलिए रखा गया फिल्म का नाम 'शेरशाह'

बता दें कि परमवीर चक्र प्राप्‍त कैप्‍टन विक्रम बत्रा करगिल युद्ध के असली हीरो थे। उनकी जाबांजी के किस्‍से न‍ सिर्फ हिंदुस्‍तान, बल्‍कि पाकिस्‍तान में भी सुनाए जाते हैं। कैप्‍टन विक्रम बत्रा की बहादुरी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है करगिल में पाकिस्‍तान के घुसपैठ‍िए सैनिकों ने ही उन्‍हें कोडनेम 'शेरशाह' दिया था। इसीलिए इस फिल्म का नाम भी 'शेरशाह' रखा गया है।

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