भ्रष्ट प्रशासनिक अधिकारियों की शह पर पनप रहा शिक्षा माफिया सरदाना का अवैध कारोबार

देवास
सरदाना टयुटोरियल के अवैधानिक शिक्षा कारोबार का सबकुछ अवैधानिक काला चिट्ठा सच सामने होने के बावजूद नगर निगम प्रशासन कार्यवाही करने में कोताही बरत रहा है। अक्सर आरोप लगाये जाते है कि शिक्षा विभाग, जिला शिक्षा कार्यालय के लेनदेन एवं राजनैतिक संरक्षण के कारण शिक्षा माफिया पनपते है, लेकिन शिक्षा माफिया ललित सरदाना के अवैध सरदाना टयुटोरियल का काला कारोबार भ्रष्ट प्रशासनिक अधिकारियो की धनलोलूपता के कारण पनप रहा है।

सतह पर सबकुछ नजर आ रहा है कि शिक्षा माफिया ललित सरदाना ने शहर के बालगढ़ क्षैत्र की अमृत पार्क, सिल्वर पार्क कालोनी में करोड़ो रूपये की अवैध बिल्डिंग को नियम विरूद्ध निर्माण किया है। शिक्षा जैसे पवित्र कार्य एवं उद्वेश्य से जुड़कर अपनी काली कमाई करते करते  शिक्षा माफिया ललित सरदाना किस प्रकार से भू माफिया की तरह अवैध बिल्डिंग तानकर बैठा है। किसी अनपढ़ व्यक्ति को भी मौके पर ले जाकर खड़ा कर दिया जाये तो वह समझ जायेगा कि नियम कायदो को ताक में रखकर, नगर निगम एवं ग्राम निवेश के भ्रष्ट अधिकारियो, पटवारी, गिरदावर को ले देकर बिल्डिंग निर्माण की गयी है।

एक छोटे से मकान से, गिने चुने बच्चों को पढ़ाने वाला ललित सरदाना, पिछले दो दशक में करोड़पति बने धनलोलुप सरदाना ने एक और बड़ा दरवाजा लगाकर एवं दुसरी और बाउण्ड्रीवाल निर्माण कर एम आर रोड़ हड़पकर आवागमन रोक दिया है। अवैध बिल्डिंग के पिछले क्षैत्र का एमओएस अमृत पार्क कालोनी वाले, कालोनाईजर को बेच दिया है, जिससे भविष्य में बच्चो की जान को खतरा हो सकता है। 5 सर्वे नम्बरो को मिलाकर एक भूमि है, जिसमे 1 एम आर मार्ग भी जुड़ा है। उस भूमि का नियम विरूद्ध नक्शा पास करवाकर, मार्ग के एक और बिल्डिंग एवं दुसरी और पार्किंग एवं पार्क का निर्माण किया गया है।

निगम और ग्राम निवेश के अधिकारियों की भ्रष्ट कार्यशैली एवं सांठगांठ की भांति ही पटवारी, गिरदावर का भी भ्रष्ट चालचलन, आचरण नहीं है तो उन्हे नजर क्यों नहीं आया कि सरदाना टयुटोरियल की भूमि पांच सर्वो की भूमि है। जिसके बीचाबीच 30 मीटर का मुख्य मार्ग स्थित है। जिसे सर्वे की भूमि से कम नहीं किया गया है। 30 मीटर वाले मार्ग के एक और सरदाना ने अवैध बिल्डिंग तान दी और दुसरी और पार्किंग, पार्क निर्माण कर दिया। एमओएस की जमीन हड़पने या बेचने वाले धन एवं जमीन के भूखे सरदाना को  शायद बच्चों की जान की कोई परवाह नहीं हो,  लेकिन नगर निगम का फायर विभाग इस पर गौर क्यों नहीं कर रहा है। भूमि का हेरफेर करते हुए सरदाना ने अवैध बिल्डिंग के निर्माण में सीबीएसई के नियमो की खुलेआम उड़ाई है।

सीबीएसई के नियमानुसार जिस भूमि पर स्कूल होता है, वहां  भूमि का एक ही भूखंड होना चाहिये। यदि भूमि की दो से अधिक सर्वेक्षण संख्याएॅ है, तो सभी सर्वेक्षण संख्याएॅ/भूखंड एक दुसरे से सटे अथवा जुडेÞ होना चाहिये और पुरी भूमि का एक ही भूखंड होना चाहिये। किसी भी निर्माण  करने वाली सोसाइटी, ट्रस्ट, कंपनी के स्कूल के पास निम्नलिखित मानदंडों के अनुसार भूमि के संबंध में शर्तो को पुरा करना आवश्यक होता है। छोटे छोटे कर्मचारियों तक के वेतन को हड़प लेने वाले सरदाना के काले कारोबार में, काला ही काला या काला पीला सबकुछ सामने प्रत्यक्ष होने के बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों को यह नजर क्यों नहीं आ रहा है।

सरदाना के विरूद्ध कार्यवाही में कोताही क्यों बरती जा रही है।  वर्ष 2016 से लाखो रूपये के सम्पत्तिकर की चोरी करता आ रहा है। यह सच तो निगम कार्यालय के अन्दर ही मौजूद है। सरदाना टयुटोरियल के कर का खाता वर्ष 2016-2017 से वर्ष 2020-2021 तक ओपन लैंड का दर्शाया गया है, जबकि सरदाना टयुटोरियल के संचालक ने वर्ष 2016 में ही बिल्डिंग का नक्शा पास करा लिया था। इस गड़बड़ घोटाले में निगम में सम्पत्तिकर विभाग के अधिकारी सवालो एवं जांच के घेरे में है कि जब  5 वर्ष पूर्व ही बिल्डिंग का नक्शा पास करवा लिया है तो उससे ओपन लैंड का सम्पत्तिकर क्यों लिया जा रहा है।

इनका कहना है
सरदाना टयुटोरियल के संचालक द्वारा एम आर रोड़ रोकने, एमओएस की जगह नहीं छोड़ने, नियम विरूद्ध निर्माण एवं सम्पत्तिकर की चोरी से सम्बंधित जो भी जानकारियॉ सामने आ रही है। उस पर जांच के लिये बोल दिया गया है। जांच के उपरांत कार्यवाही की जायेगी।
विशालसिंह चौहान-निगमायुक्त

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