राज्य महिला आयोग का पिछले एक साल का रिपोर्ट कार्ड उपलब्धियों से भरा रहा

रायपुर
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल  के आदेशानुसार छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति के बाद आयोग में काम करने का अवसर अगस्त माह के शुरूआत में मिला।पूरे एक साल के कार्यकाल में 3 बार के लॉकडाउन में कुल साढ़े पांच माह का लॉकडाउन रहा। कोरोना संक्रमण के दिशा-निदेर्शों के तहत इस अवधि में जन-सुनवाई नहीं हो सकी। इस प्रकार कुल साढ़े पांच माह की अवधि ऐसी थी जिसमें पीड़ितों से मिला तो जाता था, लेकिन जन सुनवाई करने के लिए राज्य और केन्द्र शासन की तरफ से प्रतिबंध था। इस तरह आयोग को अपने एक साल के कार्यकाल में महज साढ़े छ: माह ही अधिकारिक कार्य करने का अवसर मिला। लॉकडाउन के दौरान पीड़ित महिलाओं के लिये टेलीफोनिक माध्यम से उनके मामलों में राहत पहुंचाई गई और अखबारों, समाचारों के माध्यम से स्वत: संज्ञान लेकर भी कई मामलों में कार्यवाही किया गया।

अध्यक्ष ने इस एक साल में सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ का सघन दौरा किया और प्रत्येक जिले में जन सुनवाई भी किया। इस प्रकार कुल साढ़े छ: माह में, 26 जिलों में, कुल 62 जन सुनवाईयां किया गया जिसमें एक हजार 401 प्रकरणों की सुनवाई की जा चुकी है। इनमें से कुल 410 प्रकरणों (34.4 प्रतिशत) को अंतिम सुनवाई कर पूर्णत: निराकृत कर नस्तीबद्ध किया जा चुका है। कई मामलों में उभय पक्षों के बीच समझौता करवाकर आयोग द्वारा उनके सुखी गृहस्थ जीवन की पुन: शुरूआत का प्रयास किया गया। कई प्रकरणों में आयोग की ओर से दोनों पक्षों की निगरानी भी किया जा रहा है।

ज्ञात हो आयोग में अध्यक्ष डॉ. नायक के कार्यभार ग्रहण करने के समय 582 मामले पूर्व से लंबित थे। इन प्रकरणों में अध्यक्ष द्वारा तीव्र गति से नियमित एवं लगातार जन सुनवाई किये जाने से महिलाओं का विश्वास महिला आयोग के प्रति बढ़ा, और न्यायालय में अपना प्रकरण ले जाने के स्थान पर, पीड़ित महिलाओं ने आयोग को ज्यादा महत्व दिया,क्योंकि यहां पर महिलाओं को किसी भी प्रकार की राशि व्यय नहीं करनी पड़ती और न ही वकील की जरूरत पड़ती है, और बिना किसी परेशानी के उनके समस्याओं का वैधानिक समाधान भी आयोग में किया जा रहा है।

महिला आयोग द्वारा लिये गये प्रमुख निर्णय
इस एक साल के कार्यकाल में आयोग द्वारा कुछ प्रमुख निर्णय लिए जिसमे बस्तर की 71 बेटियों को एन एम डी सी ने नौकरी नहीं दिया था, आयोग की सुनवाई के बाद 61 बेटियों को नौकरी मिलना सुनिश्चित हुआ।कोरिया के अपर कलेक्टर के खिलाफ निर्णय लिये गये।अम्बिकापुर में सखी सेंटर की प्रशासिका को हटाया गया।भरण-पोषण के कई मामलों में तीन हजार, सात हजार, दस हजार, चौबीस हजार, पचास हजार, और एक लाख रुपए प्रतिमाह भरण-पोषण के निर्णय लिये गये।शादी का सामान वापसी कई मामलों में कराया गया।बुजुर्ग महिलाओं की सम्पत्ति दिलाने और अभद्र व्यवहार करने वालों के खिलाफ कार्यवाही की गयी।इसी तरह 11 वर्ष पुराने मामलें में अनुकंपा नियुक्ति दिलाई गई।दो मामलों में डी एन ए टेस्ट का आदेश दिया गया। एक मामले में नार्को टेस्ट का आदेश भी दिया गया और एक मामले में फॉरेंसिक एक्सपर्ट को घटनास्थल की जांच करने के निर्देश दिये गए है।

इस दौरान पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करने पर कई मामलों में कड़ी कार्यवाही किया गया।जगदलपुर में एक ही दिन में 98 मामलों की सुनवाई करने का रिकॉर्ड भी बना।यह उदाहरण साल भर के निर्णयों में से कुछ प्रमुख मामलों के है।जिससे यह पता चलता है कि आयोग ने महिलाओं से संबंधित हर प्रकार के मामलों में अपनी कार्यवाही किया है।

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