हरसी बांध लबालब, प्रशासन ने किया 24 गांवों में अलर्ट जारी

डबरा
  ग्वालियर जिले के डबरा अंचल के किसानों के लिए जीवनदायिनी कहा जाने वाला हरसी बांध लगभग लबालब भरने को है, लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है और बांध से निकली पार्वती नदी के किनारे के लगभग 24 गांवों में अलर्ट जारी कर दिया है। वहीं हालात की गंभीरता को समझते हुए प्रशासनिक अधिकारी बांध से लगी नहरों को भी खोलने की तैयारी में लग गए हैं।

गौरतलब है कि हरसी बांध के ऊपरी इलाके और अंचल में लगातार हो रही बारिश के कारण बांध में पानी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है यही कारण रहा कि प्रशासन लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है,  क्योंकि वर्ष 1971 में अधिक वर्षा होने के कारण हरसी बांध का वाटर लेवल 268.33 मीटर और बेस्ट वियर का लेवल 264.95 मीटर होने के कारण भितरवार तहसील के कई गांव प्रभावित हुए थे जो बांध से लगी पार्वती नदी के किनारे बसे हुए हैं।  उसी को देखते हुए प्रशासन ने  आज पार्वती नदी के किनारे बसे गांव ग्राम पनानेर, कैठोद, धोबट, खिरिया, बोढी, जखवार, गधोटा, लोहारी, सिल्हा, पलायछा, खेरा, नजरपुर, आदमपुर, शासन, भितरवार, मछरया, पमाया, घाट खेरिया, डडुमर, गोलेश्वर, सहारन, मसूदपुर, खरगोली और बासोडी में अलर्ट जारी किया है।

जिला प्रशासन ने इन 24 गांवों में मुनादी करवा दी है और लोगों से सावधान रहने की अपील की है। उधर यदि फ़ीट में बात की जाए तो हरसी बांध की कुल क्षमता 869 फीट है जो शाम 6:00 बजे तक 864.77 फिट तक भर चुका है करीब 3 फीट और पानी रह गया है उसके बाद बेस्ट वियर चालू हो जाएगा यदि बात करें तो हरसी बांध के कैचमेंट एरिया मैं हुई बारिश के अलावा काकेटो डैम से पार्वती नदी के माध्यम से होते हुए बेस्ट वियर में 57,700 क्यूसेक पानी आ रहा है जिससे करीबन 2 घंटे में बांध के संपूर्ण भरने की संभावना जताई जा रही है।

हरसी बांध के हालातों पर नजर रख रहे भितरवार के तहसीलदार श्यामू श्रीवास्तव का कहना है हरसी बांध का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है मौके का निरीक्षण किया गया है।  नहरों को खोलने की तैयारी है बांध से लगी पार्वती नदी के किनारे के 24 गांव में अलर्ट जारी कर दिया गया है प्रशासन की हर बात पर नजर है।

कैसे बना हरसी डैम और किसने बनवाया

हरसी बांध एशिया का पहला मिट्टी से बना बांध है। 1927 में इसका निर्माण ग्वालियर रियासत के तत्कालीन महाराजा जीवाजी राव सिंधिया ने आरंभ कराया था जो लगातार 8 वर्षों तक चला एवं 1935 में बनकर तैयार हुआ जानकार बताते हैं कि उस समय इसके निर्माण पर 78 लाख रुपये खर्च हुए थे। शुरू में इस बांध से 25000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती थी बाद में मोहनी सागर बांध बनने से इसकी पोषक नहरें बनी और रकवा बढ़कर 65000 हेक्टेयर हो गया।  हरसी बांध के तीन गेट है जिनका डिजाइन हॉलेंड के इंजीनियर बीएफ डी एच डायफ ने तैयार किया था और बाद में वर्ष 1940 में उन्होंने डबरा में शुगर मिल की स्थापना कराई। हरसी बांध 777.70 स्क्वायर किलोमीटर क्षेत्र में फैला है इसके पार की लंबाई 2133.60 मीटर है तो ऊंचाई 29.26 मीटर। उक्त बांध की क्षमता 199.66 मिलियन घन मीटर पानी भरने की है।

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