32 असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति निरस्त कर दिव्यांग उम्मीदवारों को दिया जाएगा मौका

भोपाल
प्रदेश के कालेजों में पदस्थ 32 असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्तियों को उच्च शिक्षा विभाग ने निरस्त कर दिया है। इसमें प्राणी शास्त्र, वाणिज्य, भौतिक शास्त्र , रसायन शास्त्र, गणित, इतिहास, अंग्रेजी, वनस्पति शास्त्र, अर्थ शास्त्र शामिल हैं। कुछ प्रोफेसरों को मालूम था कि उनकी नियुक्तियां सही आरक्षण के तहत नहीं हुई हैं। इसलिए उन्होंने दो साल में अपनी आमद तक कालेजों में दर्ज नहीं कराई है। ऐसे प्रोफेसरों की संख्या करीब आधा दर्जन है। ये नियुक्तियां प्रमुख सचिव अनुपम राजन द्वारा की गई थीं, जिन्हें कुछ उम्मीदवारों ने बताया था कि उनके द्वारा कराई जा रही नियुक्तियां नियमों के मुताबिक हैं। इसलिए बाद भी उन्हें विभाग में पदस्थ होते ही फटाफट नियुक्तियां कर दी थीं। आरक्षित उम्मीदवार कोर्ट पहुंचे और हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव की जल्दबाजी को दरकिनार कर दुध का दुध और पानी का पानी एक तरफ कर दिया है।

आरक्षण नहीं मिलने पर दायर हुई थी याचिका
विभाग ने हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देकर मप्र लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित असिस्टेंट प्रोफेसरों के चयन व उनकी नियुक्ति को निरस्त किया है। यह सभी परिवीक्षा अवधि में अस्थायी रूप से सेवाएं दे रहे थे। ऐसे में दिव्यांग श्रेणी के उम्मीदवारों की नियुक्ति की राह खुली है। विभाग द्वारा उन्हें नियुक्त करने के आदेश जारी किए जाने लगे हैं।  रोस्टर में गड़बड़ी के मामले में हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन है। रोस्टर में दिव्यांग श्रेणी के उम्मीदवारों को नियमानुसार आरक्षण नहीं मिलने के कारण हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। कोर्ट के आदेश के बाद विभाग ने नौ विषयों में सुधार किया है।

कोर्ट में तलब अफसर और दस्तावेज
दिव्यांग श्रेणी के मामले में हाईकोर्ट में डॉ. शिवेंद्र सिंह परिहार, भावना शर्मा, राजभान सिंह बुंदेला सहित 6 उम्मीदवारों की ओर से एडवोकेट संतोष कुमार रोंटा द्वारा याचिका दायर की गई है। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई कर सभी दस्तावेजों के साथ विभागीय अधिकारियों को तलब किया था। उम्मीदवारों का कहना है कि कोर्ट के आदेश के बाद भी विभाग ने दिव्यांगों को उतने पद आरक्षित नहीं किए हैं, जितने नियमानुसार होने थे।

 

 

 

 

 

 

छह प्रतिशत आरक्षण लागू
उम्मीदवार शिवेंद्र सिंह ने बताया कि एमपीपीएससी द्वारा जारी किए गए मूल विज्ञापन में दिव्यांग श्रेणी के 384 पद थे। इसके बाद एक अन्य आदेश का हवाला देकर पद संख्या कम कर 211 कर दी गई। 19 अप्रेल 2020 को कोर्ट ने उच्च शिक्षा विभाग और एमपीपीएससी को आदेशित किया कि दिव्यांग श्रेणी का आरक्षण स्वीकृत पदों पर 6 प्रतिशत (दो-दो प्रतिशत पद श्रवणबाधित, दृष्टिबाधित और अस्थिबाधित उम्मीदवारों के लिए आरक्षित कर) विषयवार सुनिश्चित किया जाए और संशोधित चयनसूची जारी की जाए।

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