इसरो जासूसी केस: पूरे मामले के पीछे पाकिस्तान का हाथ होने का शक : सीबीआई 

कोच्चि
चर्चित इसरो जासूसी केस में सीबीआई की ओर से केरल उच्च न्यायालय में गुरुवार को कहा गया है कि इस पूरे मामले के पीछे उसे पाकिस्तान के होने का शक है। सीबीआई ने इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व अधिकारी आरबी श्रीकुमार की अग्रिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए यह दलील दी। सीबीआई ने कहा किवैज्ञानिक एस. नंबी नारायणन से जुड़े जासूसी मामले में उनको पाकिस्तान की संलिप्तता का काफी ज्यादा संदेह है। टेस्ट ड्राइव ऑफर: निसान मैग्नाईट अब आपके शहर में – यहां क्लिक करें। केरल हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद गुजरात के सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक और आईबी के पूर्व उप निदेशक श्रीकुमार को राहत दे दी और सीबीआई से कहा कि उनको सोमवार तक गिरफ्तार ना किया जाए। श्रीकुमार 1994 के जासूसी मामले में नारायणन और अन्य को फंसाने की साजिश रचने के आरोपी रहे हैं। इससे पहले सोमवार को केरल उच्च न्यायालय ने इसरो जासूसी मामले में केरल पुलिस के दो पूर्व अधिकारियों, एस. विजयन और थंपी एस. दुर्गादत्त दोनों को दो सप्ताह के लिए अंतरिम जमानत दे दी थी। 

1994 का है ये मामला 1994 में इसरो वैज्ञानिक एस. नांबी नारायणन को एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी, मालदीव की दो महिलाओं और एक व्यवसायी के साथ जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। मामले की जांच के बाद नंबी नारायण को सीबीआई ने 1995 में रिहा कर दिया था। सामने आया था कि नारायण को मामले में फंसाया गया था। सीबीआई ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा था कि नारायणन की अवैध गिरफ्तारी थी और केरल के तत्कालीन आला पुलिस अधिकारी इसके लिए जिम्मेदार हैं। बीते कई सालों से नारायण उन अफसरों के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, जिन्होंने उनको फंसाया था। इस मामले में कई सीनियर अफसरों के नाम सामने आए हैं। 1998 में सुप्रीम कोर्ट ने जासूसी मामले में मुक्त होने के बाद राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि नंबी नारायण को मुआवजा दिया जाए। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी मार्च 2001 में नंबी नारायण को दस लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था।
 

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