नेक कार्य, निराश्रित बच्चों को समाजसेवी संस्था जिन्दगी ना मिलेगी दोबारा ने दिलाया आश्रय
रायपुर
अपने नाम के अनुरूप समाजसेवी संस्था जिन्दगी ना मिलेगी दोबारा ने एक और नेक कार्य किया है जिसकी भूरि भूरि प्रशंसा हो रही है। बेटी से दुष्कर्म के मामले में पिता के जेल चले जाने व अकेली माँ के लिए बच्चों का भरण पोषण कठिन होने के बाद दर दर भटकने को मजबूर माँ को बड़ा आसरा मिला समाजसेवी संस्था जिन्दगी ना मिलेगी दोबारा से,संस्था की सुषमा तिवारी को जब इसकी जानकारी हुई तो उन्होने कुछ सहयोगियों से इस विषय पर चर्चा की और तय किया कैसे बच्चों को आश्रय दिलाय जाए और मां को काम ताकि उन्हे अपनी जिन्दगी दोबारा जीने का मौका मिले। 4 बच्चों को सरकारी आश्रय केन्द्र ह्यबाल आश्रम व बालिका केन्द्र तक नियमागत पहुंचाया गया। बच्चों व मां की भावुकता को देखकर कुछ पल के लिए स्वंय भावुक हो गए सुषमा तिवारी ने बताया कि जैसे ही उन्हे इस बात कि जानकारी हुई कि अपने खुद की बेटी के साथ दुष्कर्म की सजा भुगत रहे पिता के दूसरे बच्चे दर-दर भटक रहे हैं, तुरन्त उन बच्चों की माँ से मिलकर उसे आत्म निर्भर बनने के लिए प्रेरित किया साथ ही उसे सुरक्षित इलाके में एक घर किराए पर दिलवाया। परन्तु माँ के काम में जाते ही बच्चे घूम-घूम कर लोगों से भीख मांगने लगते, बेटियों के सुरक्षा की भी फिक्र होने लगी क्योंकि अपने खुद के पिता से जब वह बेटी को नही बचा पाई तो बाकी बेटियों के लिए चिंता करना स्वाभाविक था। तब उनकी माँ से बात करके बेटियों को बालिका गृह व बेटे को सरकारी आश्रय केंद्र बाल आश्रम में पहुंचाने का तय किया। शुरू में तो लगा कि उन्हें वहां आसानी से दाखिला मिल जाएगा पर कई दिनों के अथक प्रयास व लंबी-जटिल शासकीय नियमों की प्रक्रिया से गुजरने के बाद ही उनके लिए व्यवस्था हो पायी। इस काम को अंजाम तक पहुंचाने में संस्था के संरक्षक अजय शर्मा, संस्था के सदस्य संतोष साहू ,समाजसेवी मोहन चोपड़ा,राजेंद्र निगम का विशेष सहयोग रहा।
