गृह विभाग के आदेश के बाद भी प्रदेश में हर दिन दर्ज हो रहे अवैध खनिज परिवहन

भोपाल
प्रदेश में गुना, छिंदवाड़ा, जबलपुर, छतरपुर और मुरैना जिलों में चार माह में अवैध परिवहन के सर्वाधिक केस दर्ज किए गए हैं। सीहोर और होशंगाबाद समेत नर्मदा नदी से सटे कई जिलों में इस तरह के मामले अपेक्षा के अनुरूप काफी कम हैं। अवैध परिवहन के 1200 केस खनिज विभाग ने दर्ज किए हैं। सरकार के रिकार्ड में पिछले चार माह में अवैध खनन और भंडारण के औसत 44 और 40 केस ही हर माह दर्ज हुए हैं।

प्रदेश में रेत, बाक्साइट, चूना पत्थर समेत अन्य खनिजों की अवैध खनन, भंडारण और परिवहन पर रोक लगाने में खनिज महकमा नाकाम साबित होता रहा है। इस विभाग को सुरक्षा के लिए होमगार्ड के जवान दिए जाने के गृह विभाग के आदेश के बाद भी अब तक इस पर अमल नहीं हो पाया है। उधर खनिज के अवैध कारोबार में लिप्त माफिया अपनी मनमानी पर उतारू है। इस कारण अवैध कारोबार के सभी मामले पकड़ में नहीं आते हैं और उन पर कार्यवाही नहीं हो पाती है।

प्रदेश में खनिज के अवैध परिवहन के मामले चार माह में सबसे अधिक सामने आए हैं। विभाग की रिपोर्ट के अनुसार अब तक 1199 केस दर्ज किए गए हैं। इसमें अप्रेल में 291, मई में 289, जून में 543 और जुलाई में 76 केस रजिस्टर हुए हैं। सबसे अधिक 64 मामले शहडोल जिले में कायम हुए हैं। इसके बाद सीहोर में 55, इंदौर में 53, बालाघाट में 47, रतलाम में 45, छिंदवाड़ा में 43, बड़वानी व बैतूल में 40-40 अवैध परिवहन करने के मामले दर्ज हुए हैं।

खनिज विभाग के मुताबिक अप्रेल 21 से जुलाई में अब तक अवैध भंडारण के 162 केस 27 जिलों में दर्ज किए गए हैं। पच्चीस जिलों में इसको लेकर कोई केस ही दर्ज नहीं हैं। सबसे अधिक 29 मामले गुना और 28 केस छिंदवाड़ा जिले में दर्ज किए गए हैं। जबलपुर में 13, छतरपुर में 11 और मुरैना में दस केस दर्ज हुए हैं। सीहोर में छह और होशंगाबाद में एक मामला ही सात माह में शासन के रिकार्ड में दर्ज है।

अवैध खनन के दर्ज आंकड़ों से पता चलता है कि चार माह में 182 केस कायम किए गए। इसमें अप्रेल में 43, मई में 45, जून में 77 और जुलाई में 14 केस दर्ज करना शामिल है। सबसे अधिक 13 अवैध खनन के केस उमरिया जिले में दर्ज किए गए हैं। इसको लेकर विभाग के अफसर स्वीकार करते हैं कि चूंकि अमला अवैध खनन की जांच करने मौके पर समय-समय पर नहीं पहुंचता। इसलिए इस तरह के मामले कम सामने आए हैं। स्टाफ और फोर्स की कमी को इसका आधार बनाया जाता है।

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