आलू के छिलके से होगी अब गंगा की सफाई

प्रयागराज
वैसे तो आलू हर घर में इस्तेमाल होने वाला सब्जियों का राजा है। इसका छिलका अमूमन कूड़ेदान में फेंक दिया जाता है। अब यही आलू का छिलका गंगा को स्वच्छ बनाने में मददगार होगा। इसके साथ ही कल-कारखानों से निकलने वाले दूषित जल को शुद्ध करेगा। ट्रिपलआईटी के वैज्ञानिकों ने आलू के छिलके से नैनो आधारित स्वायत्त रूप से चालित चुंबकीय माइक्रोबॉट तैयार किया है। ये माइक्रोबॉट एक प्रकार के सूक्ष्म कण हैं जो प्रदूषित जल शुद्ध करने में मददगार होंगे।

औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला कचरा (जिसमें भारी मात्रा में ऑर्गेनिक डाई जैसे जहरीले एवम कैंसरजनक रसायन होते हैं) की सफाई में आलू के छिलके से बना माइक्रोबॉट्स काफी उपयोगी साबित होगा। यह माइक्रोबॉट्स आलू के छिलके से जैव संगत कार्बन डॉट्स का उपयोग कर एकीकृत घटक के रूप में विकसित किया गया है। जल के शुद्धीकरण में यह लगभग 100 फीसदी कारगर है।

एप्लाइड साइंसेज विभाग के डॉ. अमरेश कुमार साहू के नेतृत्व में शोध छात्र सौरभ शिवाल्कर, आरुषि वर्मा, कृष्णा मौर्य, लैब सदस्य डॉ. पवन कुमार गौतम शामिल हैं। साथ ही विभाग से डॉ. सिंटू कुमार सामंता और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के डॉ. एमडी पलाशुद्दीन एसके हैं।

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