संवैधानिक व्यवस्था के आधार पर आदिवासियों को सुविधा देने की तैयारी

भोपाल
प्रदेश में आदिवासियों के मन में भाजपा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण पैदा करने और अपनत्व जगाने के लिए राज्य सरकार पेसा कानून लागू करने की तैयारी में है। इसको लेकर एक समिति का गठन कर दिया गया है जो क्रियान्वयन को लेकर अपनी रिपोर्ट देगी कि पेसा कानून के कौन-कौन से प्रावधान लागू किए जा सकते हैं? सरकार यह चाहती है कि कानून लागू करने पर छत्तीसगढ़ जैसे हालात न बनें कि आदिवासी बाहर के लोगों को गांव में घुसने से रोकें और मनमानी पर उतारू हो जाएं। सरकार संवैधानिक व्यवस्था के आधार पर इसे अमलीजामा पहनाने और आदिवासियों को सुविधा देने की तैयारी में है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसके संकेत अनुसूचित जनजाति वर्ग के विधायकों, मोर्चा पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में दिए हैं। सीएम चौहान ने पेसा कानून की चर्चा करते हुए विधायकों से इसको लेकर सुझाव भी मांगे हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी हित में सरकार हर संभव काम कर रही है। इसके साथ ही पांचवीं व छठवीं अनुसूची में की गई अनुशंसाओं को लागू करने के बारे में भी विचार किया गया है।

मुख्यमंत्री ने सीएम सचिवालय में आदिवासी वर्ग के दो अफसरों को तैनात कर रखा है ताकि इस वर्ग के लोग सीधे इन अफसरों से संपर्क कर अपनी और क्षेत्र की समस्या बता सकें।सीएम ने कहा कि भाजपा की सरकार आदिवासियों के हित के लिए पहले ही काम कर रही है। साहूकारी एक्ट के माध्यम से इस वर्ग को राहत देने का काम किया गया है। साथ ही अन्य कई योजनाओं को भी लागू किया गया है ताकि आदिवासी वर्ग का जीवन स्तर बेहतर हो सके।

पेसा कानून में कहा गया है कि आदिवासी क्षेत्रों में पंचायतों पर राज्य विधानमंडल द्वारा बनाया गया कानून वहां के प्रथागत कानूनों, रीति-रिवाजों, धार्मिक प्रचलनों आदि के अनुरूप होगा।  प्रत्येक गांव में एक ग्राम सभा होगी जिसमें ऐसे लोग होंगे जिनके नाम ग्राम स्तर पर पंचायत के लिए निर्वाचक सूची में दर्ज हों। प्रत्येक ग्राम सभा अपने और अपने लोगों की परम्पराओं एवं प्रथाओं, सामाजिक- सांस्कृतिक पहचान, सामुदायिक संसाधन तथा विवाद निवारण के परंपरागत तरीकों की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए सक्षम होगी। सामाजिक एवं आर्थिक विकास के कार्यक्रमों एवं परियोजना को ग्राम पंचायत द्वारा क्रियान्वित करने से पहले ग्राम सभा से स्वीकृति लेनी होगी।

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