बच्चों की इम्युनिटी है मजबूत,दोबारा खोले जाने चाहिए स्कूल: एम्स चीफ गुलेरिया
नई दिल्ली
भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के दौरान बड़ी संख्या में टीकाकरण हुआ लेकिन बच्चों को अभी भी टीके नहीं लगाए गए हैं। हालांकि तीसरी लहर में बच्चों के बीमार पड़ने की संभावना को लेकर कई खबरें आती रही हैं। इस बीच एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने कहा कि देश को एक बार स्कूलों को फिर से खोलने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने बातचीत में कहा कि मैं समझता हूं अब समय आ गया है जबकि हमें स्कूलों को फिर से खोलने पर सहमत हो जाना चाहिए। गौरतलब है कि देश में अधिकांश स्कूल कोरोना की पहली लहर के वक्त से ही बंद हैं।
बीते साल नवंबर से जनवरी के बीच में कुछ दिनों तक कक्षा 10वीं और 12वीं के लिए कुछ दिनों तक स्कूल खोले गये थे , लेकिन फिर कोरोना की दूसरी लहर को देखते हुए स्कूलों को फिर से बंद कर दिया गया था। गुलेरिया ने कहा, "मैं उन जिलों में स्कूलों को खोलने की बात कर रहा हूं, जहां वायरस के मामले बहुत कम हुए हैं। गुलेरिया ने कहा, "5 प्रतिशत से कम पॉजिटिविटी रेट वाले स्थानों के लिए यह योजना बनाई जा सकती है।" हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि अगर संक्रमण फैलने के संकेत मिलते हैं तो स्कूलों को तुरंत बंद किया जा सकता है। लेकिन जिलों को अलटरनेट डे में बच्चों को स्कूलों में लाने पर विचार करना चाहिए और फिर से खोलने के अन्य तरीकों की योजना बनानी चाहिए।
डॉक्टर ने कहा कि जो बच्चे कोरोना का शिकार हो रहे हैं उनकी इम्युनिटी मजबूत होने के कारण वे खुद को जल्द ही ठीक कर पाने में सक्षम हैं, इस बात का खुलासा सीरो सर्वे में हुआ है. बता दें कि कोरोना महामारी की शुरुआत के बाद से ही देश में स्कूल व शैक्षिक संस्थान बंद चल रहे हैं. ऐसे में एक बार स्कूलों के खोलने को लेकर विचार बनाया जाना चाहिए.
बच्चों को स्कूलों में लाने का विकल्प तलाशना चाहिए
उन्होंने कहा कि प्रसिद्ध पल्मोनोलॉजिस्ट और कोविड -19 पर भारत के टास्क फोर्स के सदस्य का भी कहना है कि अगर स्कूल के खुलने की वजह से संक्रमण फैलने का संकेत मिलता है तो स्कूलों को तुरंत बंद किया जा सकता है. लेकिन जिलों को वैकल्पिक दिनों में बच्चों को स्कूलों में लाने का विकल्प तलाशना चाहिए और सभी सेकूलों को फिर से खोलने की योजना बनानी चाहिए.
डॉ गुलेरिया ने आगे कहा कि स्कूल खुलने का कारण हमारे बच्चों के लिए सिर्फ एक सामान्य जीवन देना नहीं है, बल्कि एक बच्चे के समग्र विकास में स्कूली शिक्षा का महत्व बहुत मायने रखता है. गुलेरिया ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि ऑनलाइन क्लास से ज्यादा बच्चों का स्कूल जाना क्यों जरूरी है. उन्होंने कहा कि भारत में कोरोना वायरस से बहुत कम बच्चे संक्रमित हो रहे हैं. और जो बच्चे इस बीमारी का शिकार हो रहे हैं उनकी इम्युनिटी अच्छी होने की वजह से वो खुद को जल्द ठीक कर पाने में सक्षम हैं.
एम्स और डब्ल्यूएचओ के एक सर्वे में पाया गया था कि बच्चों में SARS-CoV-2 सेरो-पॉजिटिविटी दर ज्यादा थी. इसलिए, यह संभावना नहीं है कि कोविड -19 की तीसरी लहर दो साल या उससे ज्यादा उम्र के बच्चों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगी.
