शनि पर्वत पर है वृत्त तो विवाह नहीं करेगा जातक 

नई दिल्ली
वैदिक ज्योतिष की तरह ही हस्तरेखा शास्त्र में भी शनि का प्रभाव विवाह आदि मांगलिक कार्यो पर वृहद रूप से पड़ता है। जिस प्रकार जन्मकुंडली में शनि खराब होने पर जातक का जीवन कष्टमय बना रहता है, कोई न कोई परेशानी उसे घेरे ही रहती है, विवाह में बाधाएं आती हैं। ठीक इसी प्रकार हस्तरेखा में यदि शनि पर्वत दूषित है, दबा हुआ है, कमजोर है या उस पर कोई चिह्न बना हुआ है तो जातक को उनके अनुसार फलों का भोग करना पड़ता है। 

 हथेली में शनि पर्वत मध्यमा अंगुली के नीचे होता है। भाग्य रेखा इसी पर्वत पर आकर समाप्त होती है। इसलिए शनि का सीधा संबंध भाग्य से होता है। यदि शनि पर्वत पर एक रेखा हो तो व्यक्ति को जबर्दस्त भाग्य का साथ मिलता है। एक से अधिक रेखाएं हों तो व्यक्ति के जीवन में निरंतर बाधाएं आती रहती हैं। शनि पर्वत पर आपस में काटती हुई रेखाएं हों तो यह दुर्भाग्य और चिंताओं की सूचक हैं। शनि पर्वत पर बिंदु हो तो अचानक घटनाएं होती हैं। क्रॉस का चिह्न हो तो यह शारीरिक कमजोरी और नपुंसकता का प्रतीक है। नक्षत्र हो तो मनुष्य में हत्या करने की भावना आ जाती है। वर्ग हो तो यह अनिष्टों से बचाव का सूचक है। यदि शनि पर्वत पर वृत्त का चिह्न हो तो व्यक्ति की रुचि विवाह करने में नहीं रहती है। यह आजीवन कुंवारा रहता है। त्रिकोण हो तो जातक रहस्यमयी कार्यो में रुचि रखता है। जाल बना हुआ हो तो इसे भाग्य का साथ नहीं मिलता। 

 अशुभ प्रभावों से कैसे बचें शनि पर्वत पर मौजूद अशुभ चिह्नों के कारण यदि अशुभ प्रभाव मिल रहे हों तो उस प्रभाव को कम करने के लिए शनि से जुड़े उपाय किए जाने चाहिए। ऐसे जातक को नित्य शनिदेव के दर्शन करने चाहिए। प्रत्येक शनिवार को गरीबों, दिव्यांगों को जरूरत की भोजन सामग्री भेंट करें। काली गाय की सेवा करें। बुरे कर्मो से दूर रहें। 

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