कोरोना ने रोकी रफ्तार, पंचायतों में विकास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद

भोपाल
प्रदेश की पंचायतों पर भी कोरोना का असर नजर आ रहा है। पंचायतों को निर्माण कार्य के लिए करोड़ों रुपए दिए गए काम रुकने के बावजूद प्रदेश के अधिकांश जिला में 50 फीसदी तक राशि खर्च की है। हालांकि पंद्रह जिले तो ऐसे है जिन्होंने पचास प्रतिशत से कम राशि खर्च की है।  

प्रदेश की पंचायतों में इंदिरा आवास, आंगनबाड़ी, सीएसआर, प्रधानमंत्री आवास, प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, सर्व शिक्षा अभियान, स्कूल बाउंड्रीवाल, स्कूल टायलेट, चौदहवे वित्त, पंद्रहवे वित्त, बैगा सेटलमेंट, बैकवर्ड रीजन ग्रांट, आनंद उत्सव, पीडीएस शॉप, गोदाम, सीएम हाट बाजार योजना, होस्टल, अस्पताल भवन, मडी बोर्ड निधि,मिल्क कलेक्शन सेंटर सहित कई तरह के काम करने के लिए करोड़ों रुपए जिला पंचायतों को दिए गए है। पंद्रह जिला पंचायतों के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण अंचलों में पचास फीसदी काम भी नहीं हो पाए है। जिन जिलों ने पचास प्रतिशत राशि खर्च नही की है उनमें रतलाम, अलीराजपुर, भिंड, अशोकनगर, छिंदवाड़ा, शहडोल, ग्वालियर, आगरमालवा, सीधी, राजगढ़, विदिशा, उमरिया, श्योपुर, बुरहानपुर और सतना जिले शामिल है।

इंदौर जिला पंचायत में  39काम शुरु ही नहीं हो पाए है। वहीं 2 हजार 282 काम प्रगतिरत है। भोपाल में 272 काम शुरु नहीं हुए है और 2 हजार 125 काम प्रगतिरत है। ग्वालियर में 1 हजार 460 काम शुरु ही नहीं हो पाए है जबकि 4 हजार 855 काम चल रहे है। जबलपुर में एक हजार 561 काम शुरु ही नहीं हो पाए है जबकि 10 हजार 197 काम अभी चल रहे है।

यदि पंचायतों के पूर्ण कामों के प्रतिशत पर नजर डाले तो केवल इंदौर, मंदसौर और भोपाल पंचायतों को छोड़कर किसी भी पंचायत में पचास फीसदी भी काम पूरे नहीं हो पाए है। दमोह में केवल 37 प्रतिशत, पन्ना में 36 और नीमच में 35, टीकमगढ़ में 33 फीसदी काम हो पाया है।  मुरैना में 9.84, डिंडौरी में 9.33, झाबुआ में 9.16 और सतना जिले में केवल 8.53 फीसदी काम ही पूरे हो पाए है।

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