कोरोना काल में आयुष औषधियों के उपयोग में हुई वृद्धि

भोपाल

कोरोना काल में आयुष औषधियों का उपयोग बढ़ा है। आयुर्वेद औषधियों के मार्केट में वर्ष 2020 में गत वर्ष की तुलना में दो से तीन गुना वृद्धि देखी गयी है। लोगों की इम्यूनिटी बढ़ाने में आयुष औषधियाँ सहायक सिद्ध हुई हैं। भारत सरकार के आयुष विभाग के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने यह बात अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान में "असरदार परिवर्तन-टिकाऊ परिणाम'' व्याख्यान-माला में "अपारचुनिटीज इन आयुष सेक्टर इमरज्ड आउट ऑफ कोविड-19 पेंडेमिक'' विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कही।

आयुष फार्मा कम्पनियों के प्रतिनिधियों से चर्चा

भारत सरकार के आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने सुशासन संस्थान में विभिन्न आयुष फार्मा कम्पनी के प्रतिनिधियों से चर्चा की। प्रतिनिधियों ने मध्यप्रदेश में आयुष कम्पनियों के विस्तार, आयुष उत्पादों के प्रचार-प्रसार में आने वाली समस्याओं सहित अन्य मुद्दों की जानकारी दी। कोचेचा ने समस्याओं के निराकरण एवं फार्मा कम्पनियों के क्षमता वृद्धि का आश्वासन दिया।

कोटेचा ने कहा कि आयुष प्रोडक्ट के निर्माण में तेजी लाने के उद्देश्य से एप्रूवल, लायसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया तेज की गयी है। वृहद स्तर पर औषधीय पौधे लगाने की योजना क्रियान्वित की जा रही है, इससे औषधि निर्माताओं की माँग को पूरा किया जा सकेगा।

आयुष-64 कोविड उपचार में लाभकारी

वैद्य कोटेचा ने कहा कि आयुष-64 दवा माइल्ड और मॉडरेट कोरोना में लाभकारी सिद्ध हुई है। इसके साथ ही आयुष काढ़ा, अश्वगंधा तथा गुड़ची-पीपली कोरोना को रोकने में उपयोगी रही है।

हेल्पलाइन नं. 14443

आयुष मंत्रालय द्वारा हेल्पलाइन नं. 14443 जारी किया गया है। इसके माध्यम से विशेषज्ञों द्वारा मरीजों की काउंसलिंग की गयी। आयुष किट का वितरण किया गया। मध्यप्रदेश में त्रिकटु चूर्ण का नि:शुल्क वितरण किया गया था।

कोविड-19 रिसर्च

कोटेचा ने कहा कि सीएसआईआर, आईसीएमआर, मध्यप्रदेश सरकार सहित अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर कोविड-19 पर रिसर्च किया गया। इसके आधार पर प्रोटोकॉल भी जारी किये गये। आयुष संजीवनी एप के माध्यम से लोगों का फीडबेक लिया गया। सात लाख से अधिक लोगों ने फीडबेक दिया।

मध्यप्रदेश में कोरोना के उपचार में आयुष औषधियों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया। लोगों ने इसे अपनाया भी। प्रदेश में 'वैद्य आपके द्वार' अभियान चलाया जा रहा है। मध्यप्रदेश आयुर्वेद प्रेक्टिशनर उपलब्धता में देश में तीसरे नम्बर पर है। इस वर्ष 13 हजार से अधिक मेडिकल कैम्प आयोजित किये गये। संस्थान के उपाध्यक्ष प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने कहा कि आयुष के क्षेत्र में बेहतर काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में औषधियों के निर्माण के लिये उपयोगी सामग्री पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। इनके सुनियोजित उपयोग की आवश्यकता है। इसके लिये एक नीति बनाने की जरूरत है।

इस दौरान प्रमुख सचिव आयुष श्रीमती करलिन खोंगवार देशमुख, प्रमुख सचिव वन अशोक वर्णवाल, जन-अभियान परिषद के महानिदेशक बी.आर. नायडू, संस्थान की सीईओ श्रीमती जी.व्ही. रश्मि और संचालक गिरीश शर्मा एवं एडवाइजर उपस्थित थे।

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