नई संविधान सभा से बड़ी उम्मीदें, मूलवासी महिला बनी स्पीकर

सांतियागो
चिली में एक एतिहासिक पहल हुई है। रविवार को वहां हाल ही में निर्वाचित 155 सदस्यीय संविधान सभा की पहली बैठक हुई। उसके साथ ही देश में सत्ता के न्यायपूर्ण बंटवारे के सिद्धांत पर आधारित नए संविधान को लिखने का काम औपचारिक रूप से शुरू हो गया। पहली बैठक में संविधान सभा की अध्यक्ष के रूप में एक मूलवासी महिला को चुना गया। मापुचे समुदाय से आने वाली एलिसा लॉनकॉन पेशे से डॉक्टर हैं और सांतियागो यूनिवर्सिटी में पढ़ाती हैं। उनके संविधान सभा का अध्यक्ष बनने को चिली के मूलवासी समुदायों की एक बड़ी जीत समझा गया है। आरोप है कि देश के पुराने नव-उदारवादी संविधान के तहत इन समुदायों की लगातार उपेक्षा की गई थी।

संविधान सभा के अध्यक्ष का चुनाव मत विभाजन से हुआ। लॉनकॉन को 96 वोट मिले। लॉनकॉन सोशल कॉन्वर्जेंस अलायंस की नेता हैं। संविधान सभा में 155 सदस्य हैं, जिनमें 78 पुरुष और 77 महिलाएं हैं। संविधान सभा के चुनाव के दौरान 17 सीटें मूलवासी समुदाय के लिए आरक्षित रखी गई थीं। संविधान को नए संविधान का प्रारूप 12 महीनों में तैयार करना है। उसके बाद उस प्रारूप को लेकर जनमत संग्रह कराया जाएगा।

चिली लैटिन अमेरिका के उन देशों में है, जहां सबसे पहले वामपंथी सरकार बनी थी। लेकिन 1973 सल्वादोर अलेंदे के नेत़ृत्व में बनी सोशलिस्ट सरकार का तख्ता पलट दिया गया। उसके बाद से लंबे समय तक सैनिक शासन रहा। अगस्तो पिनोशे की सैनिक तानाशाही के दौरान ही नव-उदारवादी संविधान लागू किया गया था। 2019 में इस संविधान के खिलाफ बड़े पैमाने पर जन प्रदर्शन भड़क उठे। प्रदर्शनों के जारी रहने के कारण 2020 में तत्कालीन सरकार को नई संविधान का चुनाव कराने की मांग पर राजी होना पड़ा।

नई संविधान सभा में वकीलों, शिक्षकों, गृहणियों, वैज्ञानिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों की भरमार है। जिस समय नई संविधान सभा की पहली बैठक शुरू हुई, बाहर में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठे हुए थे। वे लोग ‘अब दमन और नहीं’ का गान गा रहे थे। लोगों के संविधान सभा की बैठक के स्थल तक पहुंच जाने के कारण बैठक को कुछ समय तक के लिए स्थगित भी करना पड़ा।

उस समय स्पीकर एलिसा लॉनकॉन ने कहा- ‘हम चाहते हैं कि लोकतंत्र का उत्सव मनाया जाए। इससे हमें कोई समस्या नहीं है।’ पुराने संविधान को चिली के समाज में गैर-बराबरी का स्रोत समझा जाता था। चिली इस समय दुनिया के उन देशों में है, जहां सबसे ज्यादा आर्थिक गैर बराबरी है। संविधान सभा की पहली बैठक के दौरान जुटी भीड़ में शामिल 47 वर्षीया बैंक कर्मचारी कैरोलीना वर्गारा ने एक समाचार एजेंसी से कहा- ‘मुझे उम्मीद है कि आज शुरू हुई प्रक्रिया से ऐसा देश बनाने में मदद मिलेगी, जो सबका हो।’

विश्लेषकों का कहना है कि संविधान में किसी एक गुट का बहुमत नहीं है। इसलिए संभव है कि संविधान बनाने की प्रक्रिया लंबी और जटिल हो जाए। इस दौरान बहुत-सी तीखी बहसें देखने को मिल सकती हैं। लेकिन देश की जनता में नए संविधान को लेकर ऊंची उम्मीदें बनी हुई हैं। प्रभावशाली पादरी फिलेपे बैरियॉस ने कहा- ‘संविधान सभा में पूरे देश की नुमाइंदगी है। वे लोग बैठ कर आपस में बात करेंगे। वे वैसा देश बनाने के बारे में बात करेंगे, जैसा हम चाहते हैँ।’

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