वैक्सीनेशन टॉरगेट से बढ़ी राजस्व की पेडेंसी, संभागायुक्त ने रखा 15 दिन के अंदर खत्म करने का लक्ष्य

भोपाल
कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण की दर काफी कम हो गई है। ऐसे में करीब दो माह बाद सभी राजस्व कार्यालय खोल दिए गए हैं। वहीं, कार्यालय खोलने के साथ-साथ राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों को वैक्सीनेशन के टॉरगेट को पूरा करने में भी लगाया गया है। ऐसे में कार्यालय खुलने के बाद अफसरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती राजस्व के लंबित प्रकरणों का निपटारा करना है।

हालांकि इस बार पहली लहर के मुकाबले लंबित प्रकरणों की संख्या काफी अधिक है। इस बार अवैध कॉलोनियों के पांच सौ से अधिक प्रकरण विभिन्न राजस्व कोर्ट में लंबित हैं। जिले की कलेक्टर, एडीएम, एसडीएम और तहसीलदार व अन्य राजस्व कोर्ट की बात करें, तो यहां पर नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, व्यपवर्तन, अभिलेख दुरुस्तीकरण व अन्य के 9 हजार से अधिक प्रकरण अदालतों में पेंडिंग हैं। इनमें कई प्रकरण ऐसे हैं, जिनकी समय सीमा भी निकल चुकी है।

लगातार पेडिंग प्रकरणों की जानकारी के संबंध में संभागायुक्त कवींद्र कियावत ने अभियान चलाकर राजस्व प्रकरणों की पेंडेंसी निपटाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने 15 दिन के अंदर अभियान चलाकर पटवारी एक सप्ताह से पूर्व बी वन का वाचन कर नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन का सर्वे करेंगे। साथ ही पेडिंसी खत्म करने के लिए जो उपयोगी काम हो, वह जरुर करें जिससे आवेदक परेशान ना हो।

जनवरी माह में राजस्व बढ़ाने के लिए संभागायुक्त कवींद्र कियावत ने अवैध कॉलोनियों से लेकर सरकारी बेकार पड़ी जमीनों की नीलामी से लेकर पानी से भरी पड़ी खदानों में मछली पालन शुरू कराने के निर्देश दिए थे। जिले की कोलार, हुजूर और बैरसिया तहसील में अवैध कॉलोनियों पर जेसीबी चली। प्रकरण बनाकर एसडीएम कोर्ट में पेश किए गए, सुनवाई शुरू हो गई। नीलामी के लिए करीब 40 स्थानों पर सरकारी जमीनों को चिन्हित कर प्रक्रिया शुरू की गई।

कोरोना कर्फ्यू के दौरान सभी सरकारी कार्यालय बंद थे। अधिकारी-कर्मचारी कोविड से जुड़े काम कर रहे थे। इस दौरान सीएम हेल्पलाइन की शिकायतें लगातार आती रहीं, लेकिन उनका निराकरण नहीं हो सका। कुछ शिकायतों को विभागों ने हल की टीप लगाकर जरूर भेज दी हैं। लेकिन इनका समाधान भी संतुष्टि पूर्वक नहीं हुआ है। ऐसे में सीएम हेल्पलाइन के लंबित प्रकरणों की संख्या में भी इजाफा हुआ है।

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