लाल निवास भी हो सकता है लालबत्ती से गुलजार, भवानी बहादुर हो सकते हैं सत्ता में भागीदार

राजनांदगांव
राजनीति एक ऐसा विज्ञान है जिसमें बड़े-बड़े धुरंधरों के अनुमान भी फीके पड़ जाते हैं और राजनीति में कब राजा रंक बन जाए और रंक राजा, कहा नहीं जा सकता। जैसे जैसे लाल बत्तियां बांटने का अवसर समीप आते जा रहा है, और सत्ता में भागीदारी सुनिश्चित होने वाले किरदारों की तस्वीर स्पष्ट सामने आने वाली है, वैसे वैसे लाल बत्ती आयोग के दावेदारों की धड़कन तेज हो रही है। हर व्यक्ति इस जुगाड़ में है की मुखिया की कृपा बरस जाए और उसे भी 15 साल के वनवास के बाद कुछ तो मिल ही जाए। ऐसे लोगों की रातों की नींद उड़ गई है, अब जिन्हें सत्ता में भागीदारी दी गई थी उनके कद को भी बढ़ाया गया और कैबिनेट मंत्री और राज्यमंत्री का सम्मान देकर उन्हें आने ढाई साल के बाद होने वाले चुनाव के लिए भी कद्दावर बनाकर संगठन को मजबूत कर पुन: अपनी सत्ता हासिल करने की जुगत के परिणाम स्वरुप देखा जा रहा है द्य अब समय नजदीक आ गया है लालबत्तीयों की घोषणा का। इस पर राजनीतिक विश्लेषकों और राजनीति के बड़े धुरंधर जानकारों का मानना है कि लाल निवास के युवराज को भी लाल बत्ती का सौभाग्य प्राप्त हो सकता है।

जानकारों ने इस बात को लेकर ठोस प्रमाण रखें इसे नकारा नहीं जा सकता कि जिले की राजनीति जिस निवास से कांग्रेस पार्टी कार्यकतार्ओं से नेताओं तक का भविष्य तय करती थी, जिसका नेतृत्व सांसद स्वर्गीय शिवेंद्र बहादुर सिंह और उनकी धर्मपत्नी स्वर्गीय श्रीमती गीता देवी सिंह जो मंत्री हुआ करती थी, करते रहे, सांसद रहते हुए स्वर्गीय शिवेंद्र बहादुर राजनांदगांव जिले से कवर्धा जिले तक अपने समर्थकों की बड़ी फौज तैयार की थी, और उनके समर्थक आज भी हैं। जो कहीं ना कहीं लाल निवास के युवराज में अपना नेता ढूंढ रहे हैं, यही नहीं स्वर्गीय श्रीमती गीता देवी सिंह विधायक और मंत्री रहते हुए इतना बड़ा कार्यक्रम किया था जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी मुख्य अतिथि थी। डोंगरगांव की धरा पर लॉकर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के विशाल जनसैलाब जिसमें चाहूं ओर महिलाएं ही महिलाएं दिखती थी। उक्त कार्यक्रम को अपना मुख्य आतिथ्य दिया था।

अब उनके पुत्र भवानी बहादुर सिंह लाल निवास से जन समस्या सुनना शुरू कर दिए हैं और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज भी बुलंद कर रहे हैं। ऐसे में जिस परिवार का पहले ही दस जनपथ और अकबर रोड तक गहरी पैठ हो और प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का भी आशीर्वाद समय-समय पर मिलता रहा हो ऐसे में आने वाली राजनीतिक पृष्ठभूमि को और मजबूत करने लाल निवास के युवराज भवानी बहादुर सिंह को लाल बत्ती से नवाजा जा सकता है। जिससे उनके पारिवारिक पृष्ठभूमि से रहे नेताओं के समर्थकों को साधा जा सके और संगठन को मजबूत करने में उसका इस्तेमाल भी किया जा सके। देखना यह है कि राजनीतिक विश्लेषकों के कयास कितने सटीक बैठते हैं।

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