आर्थिक तंगी की गिरफ्त में 40 फीसदी शहरी आबादी, इलाज के लिए इंस्टैंट लोन की मांग बढ़ी
नई दिल्ली
कोरोना महामारी की दूसरी लहर लाखों लोगों को आर्थिक तंगी की गिरफ्त में ला दिया है। इस बार गांवों के मुकाबले शहरी आबादी पर ज्यादा बुरा असर देखने को मिला है। यूगोव की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, दूसरी लहर के बाद पांच में से दो शहरी आबादी की आर्थिक स्थिति बिगड़ी है। यानी 40 फीसदी लोग आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं।
यूगोव द्वारा सर्वे में शामिल लोगों ने माना है कि बीते तीन महीने में उनकी वित्तीय स्थिति ज्यादा नाजुक हुई है। हालांकि, लोगों का मानना है कि देश में कोरोना के मामले में तेजी से सुधार हो रहा है इसके बावजूद दस में से सात लोग अपने पर्सनल फाइनेंस प्रभावित होने से चिंतित हैं। सर्वे में शामिल पांच में से दो उत्तरदाताओं ने कहा कि उनकी वित्तीय स्थिति पिछले तीन महीनों में खराब हुई है, जबकि लगभग एक तिहाई (32%) में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
सात में से एक (14%) को लगता है कि इस अवधि में उनकी वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है और बाकी कुछ कहने की स्थिति में नहीं है। सर्वे में शामिल लोगों का मानना है कि उनके वित्त को स्थिर होने में समय लग सकता है जबकि 37% सोचते हैं कि उनकी वित्तीय स्थिति निकट भविष्य में (1-6 महीनों के बीच) ठीक हो सकती है। वहीं 51% को लगता है कि इसमें अधिक समय लग सकता है (6 महीने से अधिक या एक वर्ष से अधिक) जब तक मौद्रिक मोर्चे पर ठीक नहीं होती है।
