राष्ट्रपति कानपुर पहुंचते ही भाभी से मजाक करने में नहीं चूके
कानपुर
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शुक्रवार को दिल्ली से विशेष ट्रेन से झींझक और रूरा रेलवे स्टेशन पहुंचे तो लोगों को अपनेपन का अहसास करा दिया। उन्होंने कहा कि आप लोगों के बीच आने का बहुत मन करता है, हमारे और आपके दिलों के बीच कोई दूरी नहीं है। आप सभी से बातें तो बहुत करनी हैं लेकिन समय की पाबंदी है। यहां मिले अपनेपन को कभी नहीं भूल सकते। उन्होंने राष्ट्रपति और अपनों के बीच की दूरी मिटाने की कोशिश भी की। लोगों को अहसास कराया कि भले ही वह देश के प्रथम नागरिक हैं लेकिन उनके लिए अपने ही हैं। कहा कि वह परौंख गांव में पले और वहां प्राथमिक शिक्षा हासिल की। इसके बाद वह झींझक के खानपुर पढ़ने आते थे।
अपना बचपन याद दिलाते हुए बोले, झींझक स्टेशन की इन्हीं कुर्सियों पर बैठकर ट्रेन का इंतजार करते थे। यहां के हर पल उन्हें याद आते हैं। खानपुर के बाद उच्च शिक्षा के लिए वह कानपुर और फिर दिल्ली चले गए। कहा, दिल्ली से राज्यसभा और फिर बिहार के राजभवन से होकर राष्ट्रपति भवन तक पहुंचे। यहां पहुंचने में कानपुर देहात का ही योगदान है। उन्होंने कहा कि रूरा से भी उनका नजदीकी लगाव रहा है, यहां आने पर लोगों का स्नेह और प्यार मिला।
कोविंद ने लोगों का अभिवादन किया तो कुर्सियों पर बैठी पब्लिक ने खड़े होकर तालियां बजाईं। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी इच्छा पूरा कानपुर देहात घूमने की थी। ट्रेन से आने पर इच्छा पूरी हो गई। झींझक में रुकने पर रसूलाबाद विधानसभा हो गई। रूरा से अकबरपुर-रनियां विधानसभा के दर्शन हो गए। 27 को परौंख और पुखरायां जाएंगे जहां से सिकंदरा और भोगनीपुर विधानसभा का भ्रमण भी हो जाएगा। इस बात का संतोष है कि पूरा कानपुर देहात भ्रमण कर लिया। झींझक और रूरा स्टेशन पर पहुंचे कोविंद अपनों से बड़ी आत्मीयता से मिले, उनके इस व्यवहार से करीबी फूले नहीं समाए। झींझक में अपने परिवार के साथ और करीबियों से मिले तो रूरा स्टेशन पर दो परिवारों से मिलने के साथ उन्होंने संक्रमण से बचाव के लिए वैक्सीनेशन कराने की सीख दी।
