बैंकों ने 10 वर्षों में महज 12% ही बढ़ाया कर्ज देने का अनुपात
पटना
राज्य के बैंक लोगों से डिपॉजिट लेने में जितने तत्पर रहते हैं, उस अनुपात में लोन देने में उतनी उदारता नहीं दिखाते हैं. पिछले 10 वर्षों में बैंकों के लोन देने की रफ्तार में महज 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. वित्तीय वर्ष 2010-11 में बैंकों में लोगों ने एक लाख 12 हजार करोड़ रुपये जमा किये, जबकि इसकी तुलना में बैंकों ने मात्र 38,723 करोड़ रुपये का लोन बांटा था.
इस तरह सीडी रेशियो (साख-जमा अनुपात) 33.99 प्रतिशत था. 10 साल बाद वित्तीय वर्ष 2020-21 में बैंकों में डिपॉजिट बढ़कर तीन लाख 96 हजार 471 करोड़ रुपये हो गया. इसकी तुलना में उस वर्ष एक लाख 75 हजार 474 करोड़ रुपये का ही लोन बांटा गया. इस तरह सीडी रेशियो महज 46.40 प्रतिशत रहा.
इस अवधि में सीडी रेशियो में महज 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कर्नाटक व गुजरात जैसे विकसित राज्यों का सीडी रेशियो आज 100 से 130 प्रतिशत तक पहुंच गया है. इन राज्यों में बिहार जैसे राज्यों के डिपॉजिट से ही लोन बांटे जाते हैं. हालांकि, अगर इसे गुणांक में देखें, तो पिछले 10 वर्षों में बैंकों के डिपॉजिट में साढ़े तीन गुने से अधिक की बढ़ोतरी हुई है, जबकि लोन देने में साढ़े चार गुना बढ़ोतरी हुई है.
इसके बावजूद राज्य का सीडी रेशियो 50 प्रतिशत भी नहीं पहुंच पाया है. यानी बैंक अब भी जिस अनुपात में यहां के लोगों से पैसे जमा ले रहे हैं, उसमें 40 से 45 प्रतिशत राशि ही सिर्फ यहां के लोगों को लोन के तौर पर देते हैं. शेष राशि से दूसरे राज्य या अन्य कारोबार करते हैं.
