दिल्ली SIR में 33 लाख वोटरों को राहत, 20 दिन में सुलझेंगे नोटिस; मामूली गलती पर नहीं होगी परेशानी
नई दिल्ली
दिल्ली में SIR प्रक्रिया के तहत 33 लाख वोटरों को थमाए गए नोटिस के मामले में अब मतदाताओं को टेंशन लेने की कोई जरूरत नहीं है। अगर वह भारत का नागरिक है, 18 साल का है और जिंदा है, तो निश्चिंत रहिए। हर सूरत में उनका नाम वोटर लिस्ट में जुड़ जाएगा। इसके लिए चुनाव आयोग ने 20 दिन का एक मास्टर प्लान बनाया है। जिसमें इस दौरान वोटरों को दिए गए सभी तरह के नोटिसों का समाधान कर दिया जाएगा।
- चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया कि इस समस्या को जल्द से जल्द समाधान करने के लिए दो अलग-अलग सिस्टम बनाए गए हैं।
- पहला, लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी के नाम पर जिस भी किसी वोटर के नाम में थोड़ी-बहुत असमानता (गड़बड़ी) रह गई है।
- उसे 10 दिनों के अंदर मामूली दस्तावेजी प्रक्रिया के तहत दूर कर दिया जाएगा। इसके लिए बीएलओ को कहा गया है कि वह इसमें बहुत अधिक गहराई में ना जाते हुए बस उसके लेटेस्ट नाम के बारे में जानकारी कन्फर्म कर लें।
- उदाहरण के तौर पर अगर 2003 एसआईआर में उसका नाम केवल सुरेश था और अब इस नाम के पीछे सरनेम में अग्रवाल, शर्मा, कुमार, झा, चटर्जी या बनर्जी या अन्य कुछ जोड़ा गया है तो ऐसे मामलों को बहुत अधिक गंभीर ना माना जाए।
- अगर वोटर की उम्र, डेट ऑफ बर्थ, फादर नेम और उसके भारतीय होने में कोई संदेह नहीं है तो उसे किसी भी मान्य दस्तावेज के आधार पर ओके कर दिया जाए।
- ऐसा नहीं कि छोटी-छोटी क्लेरिकल मिस्टेक या फिर कमियों के रहते हुए वोटर को परेशान किया जाए।
- इससे 33 लाख में से करीब 15 लाख वोटरों की समस्या का समाधान हो जाएगा। जिसमें बीएलओ और चुनाव आयोग को बहुत कुछ अलग से करने की जरूरत नहीं होगी।
पुराने SIR से मैपिंग न होने पर भी दस्तावेज के आधार पर जुड़ सकेगा नाम
बाकी बचे 18 लाख वोटरों में से जिस किसी के पुराने एसआईआर से मैपिंग नहीं हो रही है या फिर अन्य किसी तरह की बड़ी समस्या लग रही है। तो ऐसे मामलों में भी वोटर से डिक्लेरेशन कराते हुए कोई भी मान्य दस्तावेज के आधार पर इसे वोटर लिस्ट में ऐड कर लिया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि ऐसे किसी भी मामले में अगर किसी वोटर का नाम पुराने एसआईआर में नहीं भी था तो भी अब चल रही एसआईआर प्रक्रिया में ऐसे किसी वोटर का नाम डिलीट नहीं किया जा सकता। सेंटरों पर भी जो हियरिंग चल रही हैं। उनमें भी वोटरों को बहुत अधिक उलझाने की कोई जरूरत नहीं है।
जुड़वा बच्चों और कम उम्र के माता-पिता वाले मामलों में बीएलओ खुद करें पुष्टि
ऐसे भी किसी मामले में जिनके दो बच्चे हैं और उनके डेट ऑफ बर्थ में सेम डेट आ रही है। ऐसे में अगर वोटर कहता है कि यह उनके जुड़वा बच्चे हैं तो उससे बीएलओ अपने स्तर पर कन्फर्म करके ऐसे मामलों को ओके कर दें। इसी तरह से किसी वोटर और उसके माता-पिता की उम्र में 15-16 साल का ही अंतर है तो भी बीएलओ और एईआरओ अपने स्तर पर कन्फर्म करके ऐसे मामलों का जल्द से जल्द निपटारा कर दें। सूत्रों का कहना है कि अब पुरानी वोटर लिस्ट और एसआईआर में दी गई फोटो के भी मिलान करने शुरू कर दिए गए हैं। इस मसले को 23 सितंबर को एनबीटी ने प्रमुखता से उठाया था।
समस्या दूर होते ही वोटरों को मैसेज, ऑनलाइन भी अपडेट होगी जानकारी
इसके अलावा इस अभियान में एक और काम करने की कोशिश की जा रही है। वह यह कि जिस-जिस भी वोटर की प्रॉब्लम दूर होती जाएगी। उसके पास मैसेज भेजने की भी योजना बनाई जा रही है। ताकि उस वोटर को पता लग जाए कि अब उसे सेंटर में जाने की कोई जरूरत नहीं है और उसको मिले नोटिस की समस्या दूर हो चुकी है। ऐसे वोटरों की ऑनलाइन जारी की गई लिस्ट के आगे भी समस्या समाधान लिखा जाएगा। ताकि सभी को ऑनलाइन भी यह जानकारी अपडेट हो सके।
