‘मीट बैन’ पर केरल हाई कोर्ट ने लगा दी रोक
केरल
केरल उच्च न्यायालय ने लक्षद्वीप प्रशासन के दो हालिया आदेशों- डेयरी फार्मों को बंद करने और स्कूली बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन के मेनू से चिकन सहित मांस उत्पादों को हटाने के संचालन पर रोक लगा दी। स्थगन आदेश द्वीप समूह के एक वकील द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर एक डिवीजन बेंच द्वारा जारी किया गया था, जिसमें मुख्य न्यायाधीश एस मणिकुमार और न्यायमूर्ति शाजी पी चाली शामिल थे। ।
याचिकाकर्ता अजमल अहमद आर ने आरोप लगाया कि जब प्रफुल्ल खोड़ा पटेल ने पिछले साल दिसंबर में द्वीप प्रशासक के रूप में कार्यभार संभाला था, तब उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता पशुपालन विभाग द्वारा चलाए जा रहे डेयरी फार्मों को बंद करवाना और द्वीपवासियों के भोजन की आदतों को ‘बदलवाना’ था, जिसका पालन अनन्त काल से होता चला आ रहा है। याचिका में पशुपालन निदेशक के 21 मई 2021 के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि सभी डेयरी फार्मों को तत्काल बंद किया जाए। याचिकाकर्ता अहमद ने कहा कि यह प्रस्तावित ‘पशु संरक्षण (विनियम), 2021’ को लागू करने के इरादे से किया गया था, जो गायों, बछड़ों और बैल के वध पर प्रतिबंध लगाता है।
उन्होंने कहा कि इस प्रस्तावित नियम के अनुसार, बीफ और बीफ उत्पादों की बिक्री और खरीद पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा, डेयरी फार्मों को बंद कर दिया जाएगा, दूध उत्पादों को प्राप्त करने के लिए द्वीपवासियों के स्रोत को कम कर दिया जाएगा और उन्हें गुजरात से आयातित दूध उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर किया जाएगा। अहमद ने आरोप लगाया, “यह द्वीप के लोगों के भोजन की आदतों को चुनने के अधिकार में हस्तक्षेप करने के अलावा और कुछ नहीं है, जो संविधान के तहत निहित अधिकार के खिलाफ है।”
