कांग्रेस में नहीं थम रही मुश्किल, अब कर्नाटक में CM फेस पर नाटक

 बेंगलुरु 
राजस्थान और पंजाब जैसे राज्यों में अंतर्कलह से जूझ रही कांग्रेस में अब कर्नाटक में भी नाटक शुरू हो गया है। यूं तो पार्टी यहां विपक्ष की भूमिका में है और चुनावों के लिए दो साल का वक्त अभी बाकी है, लेकिन सीएम के चेहरे के लिए अभी से रार शुरू हो गई है। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष और हाईकमान के करीबी कहे जाने वाले डीके शिवकुमार और पूर्व सीएम सिद्धारमैया के खेमों में बंटी दिख रही है। कुछ विधायक शिवकुमार के पक्ष में नजर आते हैं तो वहीं कुछ लोग सिद्धारमैया को ही अपना नेता मानते हैं। इस बीच पार्टी के सीएम फेस को लेकर बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। 

हाल ही में कर्नाटक की चमाराजपेट सीट से विधायक जमीर अहमद खान ने सिद्धारमैया को सही कैंडिडेट करार देते हुए उन्हें सीएम पद के लिए प्रोजेक्ट करने की बात कही थी। इस पर बिना किसी का नाम लिए डीके शिवकुमार ने विधायकों और पार्टी नेताओं को नसीहत दी है कि वे किसी को सीएम फेस के तौर पर प्रोजेक्ट करने से बचें। शिवकुमार ने कहा कि पार्टी सामूहिक नेतृत्व में ही चुनाव मैदान में उतरेगी। सभी नेताओं को पार्टी के अनुशासन का पालन करना होगा। बता दें कि अपने विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक इवेंट में जमीर अहमद ने कहा था कि मैं सिद्धारमैया को पूर्व सीएम नहीं कह सकता बल्कि वह भविष्य के सीएम हैं। इससे उनका सीधा इशारा था कि वही सीएम फेस होंगे और भविष्य के मुख्यमंत्री होंगे। 

यही नहीं सिद्धारमैया के भरोसेमंद कहे जाने वाले जमीर अहमद नने कहा था कि वह उनके लिए अपनी सीट छोड़ना चाहते हैं ताकि उनकी जीत सुनिश्चित हो जाए। जमीर ने कहा था कि वह चाहते हैं कि सिद्धारमैया 70,000 वोटों के अंतर से जीतें। लेकिन अब शिवकुमार के बयान से साफ है कि उन्हें चुनाव से दो साल पहले ही इस तरह की बयानबाजी रास नहीं आई है। बता दें कि कांग्रेस एक तरफ राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट खेमों के बीच संतुलन साधने में जुटी है। वहीं दूसरी तरफ पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच कलह खुलकर सामने आ गई है। ऐसे में अब कर्नाटक में तीसरा मोर्चा खुलना हाईकमान के लिए गहरी चिंता का सबब है।

इस बीच पंजाब में कांग्रेस आलाकमान ने एक तरफ मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को टीम संभालने की नसीहत दी है तो दूसरी तरफ पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी नवजोत सिंह सिद्धू से नाराज बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, गुटबाजी को खत्म करने के लिए बनाई गई तीन सदस्यीय समिति ने भी सिद्धू की सार्वजनिक बयानबाजी पर नाराजगी जाहिर की है। वहीं राजस्थान के मसले को भी हल करने के लिए हाईकमान पूरे प्रयास कर रहा है और पायलट को एसेट बताया है।

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