कोरोना से हुई हर मौत को माना जाएगा कोविड डेथ- केंद्र

नई दिल्ली

कोरोना से हुई मौत के आंकड़ों को लेकर सरकार पर आरोप लगाए जा चुके हैं  कि सरकार कोरोना से मरने वालों का सही आंकड़ा पेश नहीं कर रही है। इसके अलावा कई राज्यों पर कोरोना से होने वाली मौतों में धांधली होने का मुद्दा उठाया गया था। अब सरकार ने इस मामले पर कहा है कि कोरोना से होने वाली सभी मौतों को कोविड डेथ के रूप में ही दर्ज किया जाना चाहिए। ऐसा नहीं हो सकता कि कोरोना मरीज किसी दूसरी अन्य बीमारी से ग्रसित है तो उसे मौत का कारण बताया जाए। सरकार ने यह भी कहा कि इस मामले में  लापरवाही बरतने वाले डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई भी जाएगी। इसके अलावा डेथ सर्टिफिकेट पर भी मौत की वजह कोरोना संकम्रण बताई जाएगी।

केंद्र सरकार ने 19 जून को एक हलफनामें के जरिए सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अगर किसी मरीज को कोई गंभीर बीमारी थी और उसके बीच उसे कोरोना संक्रमण हुआ तब भी उसे कोरोना से हुई मौतों में दर्ज किया जाएगा। कोरोना से मौत होने के साथ-साथ भले ही मरने वाला मरीज दूसरी गंभीर बीमारी से भी ग्रसित क्यों न रहा हों, उसकी गिनती कोरोना डेथ में दी जाएगी। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपने हलफनामें में कहा कि नियमों का पालन न करने पर डॉक्टरों को भी सजा मिलनी चाहिए। सरकार ने साफ करते हुए कहा, अगर साफ तौर पर मौत की वजह कोरोना नहीं कुछ और दिख रही है तो उसे कोरोना से हुई मौत नहीं माना जा सकता है। जैसे- दुर्घटना में हुई मौत, जहर खाना, हार्ट अटैक आदि।

कोरोना से हुई सभी मौतों को माना जाएगा कोविड डेथ, केंद्र ने SC को बताया
 केंद्र सरकार ने कहा है कोरोना से हुई मौतों के डेथ सर्टिफिकेट में मौत की वजह को कोविड डेथ के रूप में प्रमाणित किया जाएगा। साथ ही जो कोरोना मौतों को प्रमाणित करने में विफल रहे उन संबधित डॉक्टर और पदाधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।

पिछले साल ICMR के दिशानिर्देश किए थे जारी

पिछले साल ICMR द्वारा तैयार की गई गाइडलाइन्स को जारी करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा था कि कोरोना-19 से हुई मौतों में अंदरूनी कारणों को पहचाना जाना चाहिए। जब किसी व्यक्ति की मौत निमोनियां, सांस लेने में दिक्कत, हृदय समस्या या खून के थक्क जमने से हुई हो, जिनके कारण यह वायरल संक्रमण हो सकता है।

दिशानिर्देश कहते हैं कि अस्थमा, हृदय रोग, डाइबिटीज या कैंसर जैसी बड़ी बीमारी मरीज को गंभीरता के स्तर तक पहुंचा सकती है लेकिन इन्हें मौत का बुनियादी कारण नहीं माना जा सकता है।

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