यूपी के श्रीपारस अस्पताल को दी क्लीनचिट
आगरा
मॉकड्रिल मामले में श्रीपारस हॉस्पिटल को प्रशासन ने क्लीनचिट दे दी है। देर रात जारी की गई मजिस्ट्रेटी जांच और डेथ ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया कि 26 अप्रैल की सुब 96 मरीजों पर मॉकड्रिल नहीं की गई। हालांकि 26-27 अप्रैल को सात की जगह 16 मौतों को स्वीकार किया है। नौ दिन बाद जारी की गई जांच रिपोर्ट में सबसे पहले अस्पताल संचालक अरिंजय जैन के बयान का उल्लेख है। जिसमें बताया गया कि हॉस्पिटल में पांच मिनट की मॉकड्रिल करने और 22 मरीजों की छंटनी का गलत अर्थ निकाला जा रहा है। आरोप निराधार हैं। ऑक्सीजन बंद कर मॉकड्रिल नहीं की गई और न ही इसका प्रमाण है। यदि ऐसा होता तो 26 अप्रैल को सुबह 22 मृत्यु होनी चाहिए थी, जो कि नहीं हुईं। संचालक ने कहा कि अस्पताल में ऑक्सीजन थी लेकिन भविष्य में आपूर्ति का संकट था। ऑक्सीजन का असिस्मेंट ही मॉकड्रिल है। हाइपोक्सिया के लक्षण एवं ऑक्सीजन सेचुरेशन लेवल को मॉनीटर करते हुए मरीजों की ऑक्सीजन आपूर्ति को विनिंग प्रोसेस का पालन किया, जिससे ये प्रतीत हुआ कि भर्ती मरीजों में 22 अतिगंभीर हैं।
रिपोर्ट में बताया गया कि अस्पताल में अन्य जनपदों के पांच लोग भी भर्ती थे। 10 पीड़ितों के शिकायती प्रार्थना पत्र हैं, जबकि तीन सामाजिक संगठनों ने ज्ञापन दिए। डेथ ऑडिट टीम ने पाया कि 16 मरीजों में से 14 किसी न किसी कोमार्बिड बीमारी से ग्रसित थे। दो मरीजों में कोई कोमार्बिड नहीं पाई गई। जांच टीम ने पाया कि किसी भी मरीज की ऑक्सीजन बंद नहीं की गई थी। मरीजों की मौत उनकी बीमारी की गंभीर अवस्था के कारण एवं अन्य बीमारियों के कारण हुईं।
25-26 को ऑक्सीजन सिलेंडर पर्याप्त माने
जांच रिपोर्ट में बताया गया कि 25-26 अप्रैल को ऑक्सीजन ट्रेडिंग कंपनी को ऑक्सीजन की असामान्य आपूर्ति की जानकारी दी गई। जांच में मिला कि अस्पताल को 25 अप्रैल को 149 सिलेंडर, 40 रिजर्व तथा 26 अप्रैल को 121 व 15 रिजर्व सिलेंडर की सप्लाई की गई थी। अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए ऑक्सीजन के इतने सिलेंडर प्रयाप्त माने गए। कुछ मरीजों के तीमारदार वैकल्पिक व्यवस्था से भी सिलेंडर लेकर अस्पताल पहुंचे थे।
