जलवायु नीति पर G-7 देशों का रुख नहीं दिखा खास 

 नई दिल्ली 
दुनिया के सबसे अमीर देशों के समूह जी-7 के रुख से जलवायु नीति को लेकर अमीर एवं गरीब देशों के बीच खाई और गहरी होने का अनुमान है। दरअसल, जी-7 बैठक में जलवायु वित्त यानी क्लाइमेट फाइनेंस से लेकर कोरोना टीकाकरण जैसे मुद्दों पर कई उम्मीदें लगी हुई थीं, लेकिन जी-7 देशों ने जिस प्रकार से सतही तरीके से इन मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी हैं, उससे निराशा उत्पन्न हुई है। सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक पर अब दुनिया की नजरें हैं और यदि इसमें भी अमीर देशों की तरफ से कोई ठोस पहल नहीं की जाती हैं तो फिर नवंबर में होने वाली संयुक्त राष्ट्र की काफ-26 बैठक के भी असफल होने की आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं। 

हाल में ब्रिटेन में हुई जी-7 बैठक में प्रत्येक देश ने जलवायु खतरों से निपटने के लिए वित्त बढ़ाने की प्रतिबद्धता को प्रकट की लेकिन कोई स्पष्ट पेशकश नहीं की गई है। जलवायु वित्त में सुधार की बात भी 2025 तक कही गई है। जबकि दस साल पूर्व हुई सहमति के तहत 2020 से जलवायु कोष में 100 अरब डॉलर सालाना जमा होने चाहिए। उसका सबसे बड़ा दारोमदार सात सर्वाधिक अमीर देशों पर है जो जी-7 के रूप में जाने जाते हैं। इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा तथा जापान शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जी-7 देशों को जलवायु चुनौतियों से निपटने के लिए वित्त, तकनीकी एवं अन्य मुद्दों पर स्पष्ट घोषणा करनी चाहिए। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *