मोहनखेड़ा के महासंत पंचतत्व में विलीन,अंतिम यात्रा में शामिल हुए मंत्री और विधायक

 राजगढ़
 श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ के विकास प्रेरक एवं गच्छाधिपति आचार्य श्री ऋषभचंद्र सूरीश्वर जी महाराज का शुक्रवार सुबह तय समय पर कोरोना गाइडलाइन के तहत प्रशासन व गुरुभक्तों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान गुरु भक्तों की आंखों से अनवरत अश्रु धारा बह रही थी।गुरुदेव को 63वें जन्म दिन पर पंचतत्व में विलीन किया गया।चिता को मुखाग्नि की बोली सवा करोड़ में गई। एक गुरु भक्त ने इसमें अपना नाम गोपनीय रखा । यह बोली कुछ ही देर में समाप्‍त कर दी गई

 आचार्य ऋषभ मुनि के निधन पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान  ने शोक जताया है आचार्य श्री द्वारा कोरोना (corona) काल में लोगों की सेवा के लिए व्यवस्थाएं की जा रही थी। वही कोरोना मरीजों की सेवा करते करते वह खुद महामारी का शिकार हो गए।

वहीं आज उनका अंतिम संस्कार किया गया। जहां मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा  और राजवर्धन सिंह दत्तीगांव  ने भी पहुंचकर आचार्य को अंतिम विदाई दी। वहीं आचार्य मुनि की अंतिम यात्रा में शामिल भी हुए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आचार्य श्री के देवलोक गमन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मानव सेवा के मसीहा और जीव दया प्रेमी आचार्य महाराज के विचार और उनका मार्गदर्शन मानवता को सदैव प्रभावित करता रहेगा। आचार्य श्री धर्म सेवा और कल्याण की पुण्य ज्योति थे।

मध्य प्रदेश के धार जिले के मोहनखेड़ा तीर्थ को वह समग्र समाज से जोड़ना चाहते थे। उन्होंने 1984 में मानव सेवा चिकित्सालय की स्थापना की थी। इसके अलावा विकलांग चिकित्सा शिविर सहित अन्य जरूरतमंदों के लिए उन्होंने कई तरह के धर्मशालाएं स्थापित की।

इतना ही नहीं धड़के मोहनखेड़ा में कई धर्मशालाएं हैं। जिसमें प्रतिदिन 15 सौ से अधिक लोगों का भोजन बनता है। वही 10 से 15 हज़ार लोग ठहर सकते हैं। मानव सेवा का चरित्र चित्रण करने वाले आचार्य श्री ज्योतिष और तंत्र शास्त्र के भी विद्वान रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *