रिपोर्ट आई कोरोना पॉजिटिव, प्रमाण पत्र दिया सस्पेक्टिड का, न्याय के लिए भटक रहा मृतक का परिवार
छतरपुर
कोरोना महामारी में अपने को खो चुके एक परिवार को अब सही मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है। लेकिन फिर भी पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल रहा है। सिविल सर्जन से लेकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तक के कार्यालय में नाक रगड़ चुके कुशवाहा परिवार को उसके परिजन की मृत्यु का प्रमाण पत्र सस्पेक्टिड लिखकर 18 मई को जारी कर दिया गया। इस गंभीर लापरवाही के लिए आखिर कौन दोषी है और किसके इसारे पर यह पूरा खेल खेला जा रहा है, यह गंभीर जांच का विषय बन गया है।
भाजपा नेता देवीदीन कुशवाहा ने जानकारी देते हुए बताया कि उनके साले ग्राम लखनवा निवासी बृन्दावन कुशवाहा की 1 मई की रात जिला चिकित्सालय में मृत्यु हो गई थी। उसे कोरोना के लक्षण होने पर 29 अप्रैल को जिला चिकित्सालय छतरपुर में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था। अस्पताल प्रबंधन ने 30 अप्रैल को बृन्दावन कुशवाहा का कोरोना जांच के लिए सेम्पल लिया और उसे सागर भेज दिया। लेकिन रिपोर्ट आने से पहले ही 1 मई को बृन्दावन कुशवाहा जिंदगी की जंग हार गया। उसका अंतिम संस्कार कोरोना प्रोटोकॉल के तहत किया गया और जब 2 मई को सागर से रिपोर्ट आई तो मृतक बृन्दावन कोरोना पॉजिटिव पाए गए। लेकिन 18 मई को बृन्दावन के परिजनों को जो मृत्यु प्रमाण पत्र थमाया गया उसमें बृन्दावन की मृत्यु कोरोना से न होकर सस्पेक्टिड कोरोना से होना दर्शाई गई है।
मृतक बृन्दावन के परिवार को जब यह मृत्यु प्रमाण पत्र मिला तो उनके होश उड़ गए। उन्होंने इस संबंध में सिविल सर्जन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को आवेदन देकर मृत्यु प्रमाण पत्र सुधरवाने की मांग की, पर दोनों ही अधिकारियों ने यह कहते हुए अपने-अपने हाथ खड़े कर दिये कि मृत्यु प्रमाण पत्र सुधरवाना अब उनके हाथ में नहीं है।
जिला मुख्यालय पर हुई इस घटना से मृतक के परिजन काफी दुखी है और उनमें रोश व्याप्त है। मृतक की बहन भाजपा नेता देवीदीन कुशवाहा की पत्नी जिला पंचायत सदस्य हैं। श्री कुशवाहा का कहना है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे न्याय पाने के लिए मुख्यमंत्री से अस्पताल प्रबंधन और जिला प्रशासन की शिकायत करेंगे तथा हर हाल में न्याय पा कर ही दम लेंगे।
