FCI के नियमों ने प्रदेश में मुश्किल किया धान प्रोसेसिंग
भोपाल
मध्य प्रदेश सरकार ने धान की मिलिंग कराने के लिए दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि 25 से बढ़ाकर 50 रुपए प्रति क्विंटल कर दी है इसके बाद भी प्रदेश के मिलर्स धान की मिलिंग करने के लिए तैयार नहीं है। मिलर्स का कहना है कि वे भारतीय खाद्य निगम को चावल जमा नहीं कराएंगे और साथ ही प्रति क्विंटल धान से 67 किलो चावल देने की मात्रा है उसे भी वे कम कराना चाहते हैं।
मध्य प्रदेश में पिछले साल 39 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई थी। केन्द्र सरकार के प्रावधान के अनुसार प्रति 100 क्विंटल धान पर 67 किलो चावल मिलर से लिया जाता है। इसके लिए पहले उन्हें 25 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रोत्साहन राशि दी जाती थी। इसे इस साल राज्य सरकार ने बढ़ाकर 50 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। मध्य प्रदेश में इस समय 700 से अधिक मिलर्स हैं। 60 फीसदी मिलर्स की क्षमता 4 टन प्रति घंटा चावल उत्पादन की है। लेकिन इस बार के चावल में टूटन अधिक होने से मिलर्स प्रति 100 क्विंटल धान पर 67 किलो चावल तैयार कर देने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि इसकी मात्रा और कम की जाना चाहिए। वही 15 लाख से ऊपर की धान को इस बार भारतीय खाद्य निगम के पास जमा कराना है इस पर भी मिलर्स सहमत नहीं है। क्योंकि भारतीय खाद्य निगम के पास चावल की क्वालिटी चेक करने के लिए भारी-भरकम टीम है उनके मापदंड पूरे होने पर ही वे चावल लेते हैं। इसलिए मिलर्स यह चाहते हैं कि मध्यप्रदेश सरकार ही पूरा चावल खुद ले।
100 रुपए क्विंटल प्रोत्साहन राशि की डिमांड
प्रदेश के मिलर्स कि यह शर्त भी है कि उनकी प्रोत्साहन राशि बढ़ाकर 100 रुपए प्रति क्विंटल की जाए लेकिन नागरिक आपूर्ति निगम इसके लिए तैयार नहीं हैं। कुछ मिलर धान की मिलिंग कर रहे हैं अधिकांश मिलर्स मिलिंग के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। इसलिए एक बार सरकार ने फिर से मध्य प्रदेश के 700 से अधिक मिलर से धान की मिलिंग कराने के लिए टेंडर आमंत्रित किए हैं। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में बालाघाट सिवनी कटनी सहित 23 जिलों में चावल का उत्पादन होता है और पूरे प्रदेश में 700 से अधिक मिलर से जो धान की मिलिंग करते हैं लेकिन चावल तैयार करने में ज्यादा मुनाफा नहीं होने से इस बार मिलर मिलिंग के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं।
