संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर का मुद्दा और ताकत से उठाए पाकिस्तान, बताया फलस्तीन जैसा मामला: UNGA अध्यक्ष

 इस्लामाबाद 
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के अध्यक्ष वोल्कन बोजकिर ने गुरुवार को कश्मीर मसले की तुलना फलस्तीन विवाद से की और कहा संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को और अधिक ताकत के साथ कश्मीर का मुद्दा उठाना चाहिए। इस्लामाबाद में पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के साथ बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए यूएनजीए चीफ वोल्कन बोजकिर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर विवाद के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र के मंच पर और अधिक मजबूती के साथ लाना पाकिस्तान का कर्तव्य है।

पाकिस्तानी वेबसाइट डॉन के मुताबिक, कश्मीर मसले को फलस्तीन मुद्दे से तुलना करते हुए यूएनजीए अध्यक्ष बोजकिर ने कहा कि कश्मीर विवाद के समाधान के लिए बड़ी राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि यह पाकिस्तान का विशेष रूप से कर्तव्य है कि वह संयुक्त राष्ट्र के मंच पर इसे (मुद्दे) और अधिक मजबूती से लाए। उन्होंने कहा कि वह इस बात से समहत हैं कि फलस्तीनी मुद्दा और कश्मीर मुद्दा एक ही समय के हैं। उन्होंने आगे कहा कि मैंने हमेशा सभी पक्षों से जम्मू-कश्मीर की स्थिति बदलने से परहेज करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और भारत के बीच संयुक्त राष्ट्र चार्टर और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के प्रस्तावों के तहत शिमला समझौते में सहमति के अनुसार शांतिपूर्ण तरीकों से समाधान निकाला जाना चाहिए था। बता दें कि बोजकिर का परोक्ष तौर पर इशारा भारत द्वारा अगस्त, 2019 में जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के कदम की ओर था। बोजकिर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के निमंत्रण पर आधिकारिक यात्रा पर बुधवार को इस्लामाबाद पहुंचे थे।

इधर, विदेश मंत्री कुरैशी ने कहा कि उन्होंने प्रेसीडेंट को कश्मीर में "गंभीर स्थिति" के बारे में जानकारी दी थी और फलीस्तीनी और कश्मीर के मुद्दों के बीच समानता पर उनका ध्यान आकर्षित किया था। उन्होंने लोगों की आम मांगों पर प्रकाश डाला और कहा कि दोनों मुद्दे दशकों से यूएनएससी एजेंडा में रहे हैं। कुरैशी ने जोर देकर कहा, 'ध्यान दीजिए, ये अंतरराष्ट्रीय दायित्व हैं। संयुक्त राष्ट्र को जिम्मेदारी की वह भूमिका निभानी चाहिए जो अब तक बकाया है। कश्मीर विवाद एक वास्तविकता है और कोई भी इसे न तो नका सकता है या इसे यूएनएससी के एजेंडे से हटा सकता है।

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