लखनऊ के अस्पतालों में खून का संकट, मरीज की जान आफत में

 लखनऊ 
 संक्रमण की रोकथाम में सहारा बने कोरोना कर्फ्यू व डर अस्पतालों में खून का संकट खड़ा हो गया है। साधन की कमी से लोग अस्पतालों में रक्तदान करने नहीं आ रहे हैं। नतीजतन अस्पतालों में खून का संकट गहरा गया है। सबसे ज्यादा किल्लत नेगेटिव ग्रुप के खून की है। कई अस्पतालों में एक या दो यूनिट ही नेगेटिव ग्रुप का खून बचा है। इससे खून की जरूरत वाले गंभीर मरीजों की जान बचाने का संकट खड़ा हो गया है।
 
लखनऊ के सबसे बड़े केजीएमयू ब्लड बैंक खून की कमी से जूझ रहा है। यहां सिर्फ 400 यूनिट ही खून बचा है। ए और एबी नेगेटिव ग्रुप का एक भी यूनिट खून नहीं है। सामान्य दिनों में यहां करीब 3000 यूनिट खून रहता है। ब्लड एंड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की अध्यक्ष डॉ. तूलिका चन्द्रा के मुताबिक पहले रोजाना 200 से 250 यूनिट खून की आपूर्ति होती थी। अब 80 से 100 यूनिट खून की खपत है। कोरोना के गंभीर मरीज, ब्लैक फंगस, गर्भवती महिला व दिल के ऑपरेशन वाले मरीजों को खून की आपूर्ति हो रही है। ट्रॉमा में आने वालों जरूरतमंदों को खून मुहैया कराया जा रहा है।
 
रोजाना चार से पांच यूनिट खून की आपूर्ति हो रही है। मौजूदा समय में कुल 50 यूनिट ही खून बचा है। सामान्य दिनों 200 से ज्यादा यूनिट खून उपलब्ध रहता है। अब बिना डोनेशन खून मुहैया नहीं कराया जा रहा है। सिर्फ लावारिस, गर्भवती महिला व थैलसीमिया पीड़ितों को ही बिना डोनर खून मुहैया कराया जा रहा है। नेगेटिव ग्रुप का एक यूनिट खून ही उपलब्ध है। अस्पताल के निदेशक डॉ. सुभाष एस सुंदरियाल ने लोगों से रक्तदान की अपील की है। वह बताते हैं कि नॉन कोविड अस्पताल है। रक्तदान की प्रक्रिया पूरी तरह से सुरक्षित है। संक्रमण का खतरा नहीं है। अधिक से अधिक लोग रक्तदान कर जरूरतमंदों की जान बचाने में मदद कर सकते हैं।

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